मध्य प्रदेश

Holi पर अनूठी परंपरा: होली की धुरेड़ी पर वीरबम बोल मेला स्पेशल

Gulabi Jagat
15 March 2025 8:39 PM IST
Holi पर अनूठी परंपरा: होली की धुरेड़ी पर वीरबम बोल मेला स्पेशल
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Raisen: होली के दूसरे रोज धुलेंडी वाला दिन तहसील रायसेन के ग्राम बनगवां में वीर बमबोल के मेले की मन्नत को पूरा करने का दिन होता है। इस दिन कुर्मी गौर परिवार अपनी मन्नत के पूरा होने का धन्यवाद अनोखे ढंग से देते हैं। बताया जाता है कि समाज के लोग मेघनाद बाबा की पूजन कर संतान प्राप्ति के लिए मन्नतें भी मांगते हैं। समाज के दीवान सिंह गौर ओमकार गौर मुरली मनोहर गौर सीएल गौर खेमचंद गौर ने बताया कि मेले में मेघनाथ बाबा की पूजन कर पान बताशे नारियल लौंग बड़ी चिरौंजी का प्रसाद चढ़ाते हैं।इसके बाद छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार भी होते हैं। वहीं 25 फ़ीट ऊंचे मचान पर बकरे को धुरी पर उल्टा बांधकर घुमाते हैं।कुर्मी समाज के युवा, पुरूष कई फीट ऊपर कमर में रस्सी बांधकर हवा में झूलते हैं। मन्नत धारी कोड़ों से उनकी पिटाई भी करते हैं।मन्नत उतारने की इस परम्परा को वीर बमबोल की परंपरा कहा जाता है तथा देवता को ‘‘मेघनाद बाबा’’ कहा गया है।सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा के अनुसार मन्नत पूरी होने के बाद मन्नत धारी सहित कुर्मी गौर समाज के लोग परिवार सहित हिस्सा लेते हैं।बनगवां गांव के बाहरी स्थान पर लोहे और लकड़ी की 20-25 फीट ऊंची मचान बनाई जाती है।


जिस पर सीड़ी से चढ़ा जाता है। गल मचान पर एक 15-20 फीट आड़ी मोटी लकड़ी बनी होती है, जिस पर गल घूमने वाले मन्नतधारी व्यक्ति को और बकरे को औधा लटकाकर बांधा जाता है और नीचे से फिर रस्सी द्वारा एक व्यक्ति उसे मचान के चारों ओर तेजी से घुमाता है। इस प्रकार मन्नत के अनुसार तीन से पांच तक चक्कर लगाए जाते हैं। रस्सी को कोड़े से गोल गोल घूमने वाले व्यक्तियों की पिटाई भी की जाती है।उमाशंकर गौर, दौलत राम गौर एडवोकेट कहते हैं जिसके पीछे कई कारण हैं जैसे - बच्चों के स्वस्थ जीवन की कामना , घर में किसी का बीमार होना आदि शामिल हैं।वीर बम बोल का यह मेला उत्सव वास्तव में दोनों ही इस संस्कृति के मुख्य आधार हैं जो हर रीति रिवाज एवं परम्पराओं में परिलक्षित होते है। यही सब करने में लगा यह कुर्मी गौर समाज के लोग जान का जोखिम उठाकर भी रस्मों व रिवाजो को पूरा करता है।
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