मध्य प्रदेश

लेक यूनिवर्सिटी रोड पर दिखा बाघ, इलाके में सतर्कता

Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 1:18 PM IST
लेक यूनिवर्सिटी रोड पर दिखा बाघ, इलाके में सतर्कता
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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी से लोगों में दहशत का माहौल है। शहर के कोलार इलाके में अमरनाथ रोड से जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी जाने वाले रास्ते पर गुरुवार, 5 नवंबर की रात एक बाघ दिखाई दिया। सड़क पर गश्त कर रही पुलिस की डायल-112 टीम ने बाघ को सड़क किनारे झाड़ियों के पास बैठे देखा। पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसका वीडियो रिकॉर्ड किया और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग को अलर्ट कर दिया गया। बाघ की मौजूदगी सामने आने के बाद आसपास रहने वाले लोगों और इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जानकारी के अनुसार, कोलार थाने की डायल-112 टीम गुरुवार रात नियमित गश्त पर निकली थी। पुलिसकर्मी अमरनाथ रोड से जागरण लेक सिटी की ओर जाने वाले रास्ते पर पहुंच रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर सड़क किनारे मौजूद एक बाघ पर पड़ी। अचानक बाघ को देखकर पुलिसकर्मी सतर्क हो गए। उन्होंने सुरक्षित दूरी से वन्यजीव की गतिविधियों को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया।इस घटना का करीब 16 सेकंड का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में बाघ सड़क किनारे लगी जाली के दूसरी तरफ बैठा दिखाई दे रहा है। रात के समय सड़क के इतने करीब बाघ की मौजूदगी ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में बाघ की गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
घटना की जानकारी मिलते ही डायल-112 टीम ने संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद वन विभाग को भी बाघ की मौजूदगी के बारे में जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। वन्यजीव की गतिविधियों को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क किया गया है।बताया जा रहा है कि जिस रास्ते पर बाघ दिखाई दिया, वहां सामान्य दिनों में भी लोगों की आवाजाही रहती है। जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी की ओर जाने वाला यह मार्ग विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में सड़क किनारे बाघ की मौजूदगी से वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
भोपाल के कोलार, कलियासोत, केरवा और चंदनपुरा से जुड़े वन क्षेत्रों में पहले भी बाघों की गतिविधियां सामने आती रही हैं। इन इलाकों में घने जंगल, पहाड़ियां और जलस्रोत मौजूद हैं। यही वजह है कि वन्यजीवों की आवाजाही शहर से सटे क्षेत्रों तक देखने को मिलती है।विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों से सटे क्षेत्रों में बाघों का आना-जाना असामान्य नहीं है। हालांकि, जब उनके प्राकृतिक आवागमन मार्गों के आसपास सड़कें, आवासीय निर्माण और अन्य गतिविधियां बढ़ने लगती हैं, तो इंसानों और वन्यजीवों का आमना-सामना होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
भोपाल के आसपास स्थित रातापानी टाइगर रिजर्व भी बाघों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। राजधानी से लगे वन क्षेत्रों का जुड़ाव इस व्यापक वन्यजीव परिदृश्य से है। ऐसे में बाघों की गतिविधियों को समझने और उनके सुरक्षित आवागमन के लिए वन विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, गुरुवार रात दिखाई देने वाला बाघ किस विशेष वन क्षेत्र से आया था, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी के आसपास बाघ दिखाई देने की यह पहली घटना नहीं है। अगस्त 2023 में भी विश्वविद्यालय परिसर में बाघ की मौजूदगी सामने आई थी। उस समय परिसर में बाघ के घुसने की घटना ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था।
इसके अलावा चंदनपुरा और आसपास के वन क्षेत्रों में भी समय-समय पर बाघों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं। वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए पूर्व में भी इन इलाकों में निगरानी और वन विभाग की गश्त बढ़ाने की आवश्यकता जताई गई थी।बाघ की मौजूदगी वाले क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता रात के समय होने वाली आवाजाही को लेकर है। अंधेरा होने के कारण सड़क किनारे बैठे वन्यजीव को वाहन चालक दूर से नहीं देख पाते। ऐसे में अचानक बाघ सामने आने पर वाहन चालक घबराकर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
वन्यजीवों की गतिविधियों वाले मार्गों पर वाहन चालकों को धीमी गति से गाड़ी चलानी चाहिए। यदि रास्ते में बाघ या कोई अन्य जंगली जानवर दिखाई दे, तो वाहन से उतरने या उसके करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सुरक्षित दूरी बनाए रखना और जानवर को अपना रास्ता चुनने देना सबसे जरूरी सावधानी है।विशेष रूप से बाघ का फोटो या वीडियो बनाने के लिए उसके नजदीक जाना खतरनाक हो सकता है। बाघ सामान्य परिस्थितियों में इंसानों से दूरी बनाए रखना पसंद करता है, लेकिन उसे घेरने, उकसाने या उसके रास्ते में बाधा डालने से जोखिम बढ़ सकता है।विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बाघ दिखाई देने पर शोर मचाने, पत्थर फेंकने या उसे भगाने के लिए वाहन का पीछा करने जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग या आपातकालीन सहायता नंबर 112 पर सूचना देना उचित है।
इस घटना ने एक बार फिर राजधानी भोपाल के आसपास बढ़ते शहरी विस्तार और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को सामने ला दिया है। शहर के बाहरी क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं। नए रास्ते और आवासीय गतिविधियां बढ़ने से वन्यजीवों के आवागमन वाले क्षेत्रों में मानवीय उपस्थिति भी बढ़ रही है।वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह जरूरी है कि बाघों के प्राकृतिक आवागमन मार्ग सुरक्षित रहें। इसके साथ ही ऐसे क्षेत्रों से गुजरने वाले लोगों को भी संभावित जोखिम की जानकारी होनी चाहिए। जागरूकता और सावधानी से इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच टकराव की आशंका कम की जा सकती है।
फिलहाल डायल-112 टीम द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो बाघ की मौजूदगी का महत्वपूर्ण प्रमाण बनकर सामने आया है। इसके आधार पर संबंधित क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई गई है। हालांकि, बाघ के किसी व्यक्ति पर हमला करने या किसी के घायल होने की सूचना इस घटना में सामने नहीं आई है।भोपाल के कोलार इलाके में बाघ के दोबारा दिखाई देने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ी है। अब वन विभाग की निगरानी और लोगों की सावधानी महत्वपूर्ण होगी, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। विशेष रूप से जागरण लेक सिटी जाने वाले मार्ग से गुजरने वाले लोगों को रात के समय सतर्क रहने की जरूरत है।
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