मध्य प्रदेश

इंदौर : RTE के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों की मनमानी, 8 मेधावी छात्रों को चौथी के बाद निकाला

Gulabi Jagat
20 April 2026 8:38 PM IST
इंदौर : RTE के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों की मनमानी, 8 मेधावी छात्रों को चौथी के बाद निकाला
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Indore, इंदौर। शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा का अधिकार है, लेकिन इंदौर में कई निजी स्कूल इस कानून को लगातार ठुकरा रहे हैं। एडमिशन तो मुश्किल से देते हैं, लेकिन पढ़ाई के बीच में कोई न कोई बहाना बनाकर बच्चों को स्कूल से बाहर कर देते हैं।ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां वर्ष 2017 में RTE लॉटरी के माध्यम से 8 मेधावी छात्रों को इंदौर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में कक्षा KG-1 में प्रवेश मिला था। ये बच्चे पूरे चार साल तक (कक्षा चौथी तक) स्कूल में नियमित पढ़ाई करते रहे और अच्छे अंकों के साथ पास भी होते गए। लेकिन जैसे ही ये बच्चे कक्षा चौथी पास करके पांचवीं में जाने वाले थे, स्कूल प्रबंधन ने अचानक सभी 8 बच्चों को Transfer Certificate (TC) थमा दिया।स्कूल प्रशासन का कहना था कि उनका स्कूल केवल कक्षा चौथी तक ही मान्यता प्राप्त है, इसलिए पांचवीं कक्षा की पढ़ाई नहीं करा सकते। परंतु जब पीड़ित अभिभावकों ने गहन जांच की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। उसी बिल्डिंग में कक्षा पांचवीं से बारहवीं तक का स्कूल भी चल रहा है, जहां सामान्य श्रेणी के छात्र भारी-भरकम फीस देकर पढ़ रहे हैं।अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने जानबूझकर RTE छात्रों को निकाला क्योंकि उन्हें आगे की कक्षाओं में मुफ्त शिक्षा देनी पड़ती।

एक अभिभावक ने बताया, “हमारे बच्चे चार साल से इसी स्कूल में पढ़ रहे थे। अचानक TC दे दिया गया। जब हमने पूछा तो बोला गया कि पांचवीं की मान्यता नहीं है। लेकिन ऊपर की कक्षाएं तो चल ही रही हैं।”शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहींपीड़ित अभिभावकों ने इस मामले की शिकायत स्कूल शिक्षा विभाग के जिला परियोजना समन्वयक (DPC), ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) और अन्य संबंधित अधिकारियों से की। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावक अब भी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी बस आश्वासन ही दे रहे हैं।शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला RTE कानून के घोर उल्लंघन का है। RTE एक्ट 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत निजी स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25% गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है और उन्हें कक्षा आठवीं तक मुफ्त शिक्षा देनी होती है। बीच में किसी भी बच्चे को निकालना अवैध है।RTE में हो रही लगातार धांधलीइंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश में RTE के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों के साथ ऐसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। कुछ स्कूल एडमिशन के समय ही तरह-तरह के दस्तावेज मांगकर मना कर देते हैं, तो कुछ स्कूल एडमिशन के बाद फीस के नाम पर परेशान करते हैं या फिर ऊपर बताए गए तरीके से बच्चों को निकाल देते हैं।शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इंदौर में हर साल हजारों बच्चे RTE के तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेते हैं, लेकिन इनमें से कितने बच्चे कक्षा आठवीं तक पहुंच पाते हैं, इसका कोई सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। कई अभिभावक डर के मारे शिकायत भी नहीं करते।मांगपीड़ित अभिभावक अब कलेक्टर और शिक्षा मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि न सिर्फ इन 8 बच्चों को उसी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ने का अधिकार दिलाया जाए, बल्कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी हो।यह मामला RTE कानून की प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को उजागर करता है। यदि समय रहते विभाग ने कार्रवाई नहीं की तो गरीब बच्चों का सपना अच्छी शिक्षा पाने का सपना अधूरा रह जाएगा।

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