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मध्य प्रदेश
स्वास्थ्य मंत्री के जिले में अफसरों की मनमानी, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
Gulabi Jagat
3 Nov 2025 9:24 PM IST
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रायसेन। शासकीय जिला अस्पताल रायसेन में बीएमओ रवि राठौर की हिटलर शाही, सीएमएचओ डॉ एचएन मांडरे का यूं खामोश बना रहना प्रशासन की अनदेखा किया जाना स्वास्थ्य राज्य मंत्रीनरेंद्र शिवाजी पटेल के सौतेला व्यवहार के चलते जिला मुख्यालय के अस्पताल में मरीज हो रहे हैं परेशान। प्रेगनेंसी के 1 महीने अक्टूबर में ही 52 केस भोपाल और शीला देवी हॉस्पिटल रायसेन रेफर किए गए।यह प्रायवेट हॉस्पिटल जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ दीपक गुप्ता और उनके पार्टनरों का संचालित है। जबकि यहां जिला अस्पताल में रात्रि के समय प्रेगनेंसी के लिए उच्च स्तर का जिला अस्पताल है। फिर ऐसे में एनेथिसिया के दोनों डॉक्टर शाम 5 बजे के बाद भोपाल चले जाते हैं।अस्पताल में रात्रि में कोई डॉक्टर नहीं रहता।जिले के सबसे बड़े इस हॉस्पिटल में सभी प्रसूता महिलाओं को रेफर किया जाता है ।बीएमओ कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया ।आखिरकार डॉक्टर जिला मुख्यालय के सभी डॉक्टर भोपाल से अप डाउन क्यों कर रहे हैं ।सरकारी आवास में सिर्फ बोर्ड लगाकर पेशेंट को देखने के काम आता है ।बाकी कुछ डॉक्टर जिला चिकित्सालय की रोगी कल्याण की दुकानों में मेडिकल के चेंबर में दिनभर ठप्पे से कुर्सियों पर बैठ इलाज करते देखे जाते हैं।शाम 5 बजे के बाद कोई भी डॉक्टर जिला मुख्यालय पर नहीं रहता ।इतना ही नहीं प्रायवेट प्रैक्टिस के अलावा प्रायवेट हॉस्पिटलों में अपनी सेवाएं देकर कमाई करने में जुट जाते हैं।आखिरकार प्रशासन के जिम्मेदार आला अफसरों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही कहें अथवा हठधर्मिता कहें।इस लचर सुस्त रवैये की वजह का डॉक्टर भरपूर फायदा उठा रहे हैं। सरकारी डॉक्टरों के निरंकुश कार्यप्रणाली के कारण उनकी कमाई का यह गोरखधंधा जमकर खूब फल फूल रहा है।सरकारी डॉक्टरों का यह कमाई का धंधा आखिरकार कब तक यूं ही अनवरत चलता रहेगा।मोटी कमाई के इस व्यवसाय पर कब तक लगाम लगेगी ।जिला प्रशासन के कलेक्टर और उनके अधिनस्त अफसरों की अनदेखी के चलते सभी सरकारी डॉक्टर अप डाउन कर रहे हैं।
सरकारी डॉक्टर.... मरीजों को निजी अस्पताल में कराते हैं रैफर
जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर महिला रोग विशेषज्ञ का सांची रोड़ स्थित शीतल गार्डन कॉलोनी में एक नर्सिंग होम चला रहे हैं।बताया जाता है कि डॉक्टर साहब नर्सों महिला डॉक्टरों सहित दाईयों वार्डबाय समेत स्वास्थ्य कर्मचारियों को मंथली मोटा कमीशन देकर मरीजों प्रसूताओं के परिजनों को डर बताकर निजी हॉस्पिटल में रैफर करवा लेते हैं।फिर सरकारी डॉक्टर की कमाई का मीटर घूमने लगता है।इस मामले की शिकायत कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा तक पहुंची।कलेक्टर के फरमान पर एसड़ीएम तहसीलदार भरत सिंह मॉन्डले सीएमएचओ डॉ एचएन मांडरे औरस्वास्थ्य महकमे की टीम ने शीतल गार्डन स्थित प्रायवेट हॉस्पिटल पर छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया।इसके साथ ही इस प्रायवेट नर्सिंग होम का पिछले तीन साल के रैफर हुए मरीजों का रिकार्ड रजिस्टर्ड जब्त करवा लिया है।इस रिकॉर्ड की बारीकी से जांच अध्ययन के बाद इस2सरकारी महिला डॉक्टर के गड़बड़ झाले के कारनामों की पोल परत दर परत जनता के सामने आएगी।जिसका जनता को भी बेसब्री से इंतजार है।
90 फीसदी अधिकारी वाहनों से करते हैं भोपाल से अपडाउन....
यही हाल विभाग के सभी अधिकारियों को सरकारी वाहनों का दुरुपयोग करते देखा जा सकता है ।सभी बड़े अधिकारी भोपाल से सरकारी वाहनों से अप डाउन कर रहे हैं ।ऐसी स्थिति में कलेक्टर साहब मौन है ।आखिरकार क्या कारण हो सकता है। किसकीयह सबकुछ जिम्मेदारी होती है। इसको रोकने के लिए कौन रोकेगा।यह सवाल जनता कर रही है।
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