JPSC JSSC अभ्यर्थियों की सरकार से पहले दौर की वार्ता खत्म 10 अगस्त तक मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच पहले दौर की बातचीत पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार की ओर से गठित चार सदस्यीय मंत्रियों के पैनल ने 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद छात्र नेताओं ने वार्ता को सकारात्मक बताया, हालांकि उन्होंने साफ किया कि जब तक उनकी सभी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों से बातचीत के लिए सरकार की ओर से चार मंत्रियों का पैनल बनाया गया था। इसमें झामुमो के चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह और राजद के संजय प्रसाद यादव शामिल रहे। वहीं, स्टेट गेस्ट हाउस में हुई बैठक में छात्रों की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। इसमें रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल रहे।
बताया गया कि यह प्रतिनिधिमंडल आंदोलन कर रहे मुख्य छात्र समूह की ओर से वार्ता के लिए पहुंचा था। यह समूह देवेंद्र महतो के गुट से अलग है। छात्रों ने बैठक में परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और भर्ती परीक्षाओं को लेकर अपनी मांगें मंत्रियों के सामने रखीं। बैठक खत्म होने के बाद छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह पहली बैठक थी और माहौल सकारात्मक रहा। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष एक साथ बैठकर परिवार की तरह बातचीत कर रहे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
हालांकि, छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बातचीत और आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। रवीन्द्र पासवान ने कहा कि उनकी सभी मांगें बाध्यकारी और जरूरी हैं। यदि एक भी मांग पूरी नहीं होती है तो छात्र वार्ता को सफल नहीं मानेंगे और धरना जारी रखेंगे। छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राजेश प्रसाद ने भी बैठक को सकारात्मक बताया। उनके मुताबिक, 10 छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने चार मंत्रियों के सामने अपनी सभी प्रमुख मांगें विस्तार से रखीं। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगों का आधार और उससे जुड़े तथ्य भी सरकार के सामने रखे।
राजेश प्रसाद के अनुसार, मंत्रियों ने छात्रों की बात गंभीरता से सुनी और उनकी मांगों को वास्तविक बताया। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान मंत्रियों ने यह भी माना कि CGL और JPSC से जुड़ी रद्दीकरण की मांग पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। छात्रों ने कहा कि उनके और सरकार के बीच पहले संवाद की कमी थी, जिसके कारण मंत्रियों को उनकी मांगों और उनके आधार की पूरी जानकारी नहीं थी। छात्र नेताओं के मुताबिक, मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने पूरी संवेदनशीलता के साथ रखा जाएगा। छात्रों ने सरकार से कहा है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
छात्र आंदोलन से जुड़े नेताओं ने 10 अगस्त की समय सीमा भी तय की है। उनका कहना है कि यदि उससे पहले उनकी सभी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता है तो आंदोलन का अगला चरण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा। छात्रों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। कोर कमेटी से जुड़े एक सदस्य ने कहा कि सरकार के साथ बैठक सकारात्मक रही है, लेकिन छात्रों को अब ठोस भरोसे और कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों ने उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है और जल्द ही दोबारा बातचीत होने की संभावना है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल सामने आती है तो 10 अगस्त को विधानसभा तक प्रस्तावित मार्च को लेकर छात्र संगठन अपने अगले कदम पर पुनर्विचार कर सकते हैं। हालांकि, तब तक प्रदर्शन और मार्च का कार्यक्रम जारी रहेगा।
सरकार की ओर से बैठक में शामिल मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी बातचीत को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा और बैठक में उन्हें विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि छात्रों से कुछ मुद्दों पर लिखित रूप में मांगें भी मांगी गई हैं। मंत्री के मुताबिक, छात्रों की ओर से लिखित मांगें मिलने के बाद सरकार के स्तर पर आगे की प्रक्रिया तेज की जाएगी। दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि छात्रों की ओर से उठाए गए मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया है और सरकार जल्द समाधान निकालने का प्रयास करेगी। इससे संकेत मिल रहा है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी हो सकता है।
JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में पिछले कुछ समय से छात्रों का आंदोलन जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उनका जोर परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने और कथित गड़बड़ियों पर ठोस कार्रवाई करने पर है। अब इस पूरे मामले में 10 अगस्त की तारीख अहम मानी जा रही है। छात्रों ने सरकार को स्पष्ट समय सीमा दी है, जबकि सरकार ने उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और समाधान निकालने का भरोसा दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि आंदोलन शांत होता है या फिर छात्र अपने आंदोलन को और तेज करते हैं।





