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रांची। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान 'अर्णब' के प्रभाव को देखते हुए झारखंड सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। राज्य के सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसी बीच राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने चक्रवाती तूफान के कारण धान की फसलों को संभावित नुकसान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वेक्षण कराने और किसानों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार उचित मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि किसान पूरे साल कड़ी मेहनत करके अपनी फसल तैयार करते हैं। खेती ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन होती है। ऐसे में यदि चक्रवाती तूफान, तेज हवा और भारी बारिश के कारण धान की फसल बर्बाद होती है, तो इसका सीधा असर किसानों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की परेशानियों को गंभीरता से समझती है और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाएगी।
आपदा प्रबंधन मंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि प्रभावित इलाकों में व्यापक स्थलीय सर्वेक्षण कराया जाए। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किस क्षेत्र में कितनी धान की फसल प्रभावित हुई है और किसानों को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है। सर्वेक्षण के दौरान कृषि भूमि और फसलों को हुए नुकसान का निष्पक्ष तथा पारदर्शी आकलन करने पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि सर्वेक्षण के नाम पर किसी प्रकार की खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रभावित किसानों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए, ताकि पात्र किसानों को राहत प्रदान करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। मंत्री ने कहा कि सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य आपदा से प्रभावित लोगों को समय पर सहायता पहुंचाना है। इसलिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी के साथ अपना काम करना होगा।
चक्रवात अर्णब के प्रभाव से झारखंड के विभिन्न जिलों में बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम सहित कई जिलों में अधिक बारिश की आशंका जताई गई है। इसके अलावा रांची, खूंटी, चतरा, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ और अन्य क्षेत्रों में भी बारिश तथा गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। मौसम संबंधी चेतावनियों को देखते हुए जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह मौसम चिंता का विषय बन गया है। राज्य के कई क्षेत्रों में धान की फसल तैयार होने की अवस्था में है। ऐसे समय में लगातार बारिश और तेज हवाओं से फसल के गिरने, खेतों में पानी जमा होने और कटाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि खेतों में लंबे समय तक जलभराव बना रहता है, तो इससे फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान कितना हुआ है, इसका स्पष्ट आंकड़ा सरकारी सर्वेक्षण के बाद ही सामने आएगा।
इधर, राज्य सरकार ने केवल कृषि क्षेत्र ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। सदर अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने प्रत्येक सदर अस्पताल में कम से कम 10 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने को कहा है। इसके साथ ही आवश्यक दवाइयों, जीवनरक्षक औषधियों, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
चक्रवाती तूफान के दौरान भारी बारिश, जलभराव और तेज हवाओं के कारण विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसे देखते हुए अस्पतालों को वज्रपात, सर्पदंश और बारिश से संबंधित बीमारियों से निपटने के लिए विशेष तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपात स्थिति में किसी भी प्रभावित व्यक्ति को इलाज के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन को निचले इलाकों, जलजमाव की आशंका वाले क्षेत्रों और नदी-नालों के आसपास विशेष निगरानी रखने को भी कहा गया है। भारी बारिश के कारण इन क्षेत्रों में पानी भरने और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना रहती है। ऐसे में अधिकारियों को लगातार स्थिति की समीक्षा करने तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन कार्यों में लापरवाही, अनावश्यक देरी या संवेदनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संभावित भारी बारिश से जनजीवन को सुरक्षित रखना और कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान का सही आकलन करना है। किसानों के लिए धान की फसल उनकी आय का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में फसल को नुकसान पहुंचने पर आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
फिलहाल झारखंड के सभी जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित किसानों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी। अब नुकसान के सर्वेक्षण से स्पष्ट होगा कि चक्रवात अर्णब के कारण राज्य में कितनी कृषि भूमि और धान की फसल प्रभावित हुई है तथा कितने किसान सहायता के पात्र होंगे।
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