झारखंड
JSSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला, पटना और छपरा के दो एजेंट CID रिमांड पर
Rajeshwari Nishad
8 Oct 2026 9:52 PM IST

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रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) में कथित पेपर लीक और धांधली के मामले में सीआईडी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी ने बिहार के पटना और छपरा से जुड़े दो एजेंटों की भूमिका का खुलासा किया है। आरोप है कि इन एजेंटों ने परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्थानों पर ले जाकर प्रश्नों और उनके उत्तरों को याद कराया था। इस मामले में पटना निवासी राजन कुमार और छपरा निवासी मनु कुमार सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के दो अन्य कर्मचारियों को भी सीआईडी ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों तक परीक्षा से संबंधित प्रश्न और उत्तर किस माध्यम से पहुंचे और पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
पटना के राजन कुमार पर अभ्यर्थियों को प्रश्न रटवाने का आरोप
सीआईडी ने सितंबर 2026 में पटना जिले के नेवरा थाना क्षेत्र निवासी राजन कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, राजन कुमार ने कई अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में पहुंचाया था।
आरोप है कि परीक्षा से पहले वहां अभ्यर्थियों को प्रश्नों और उनके उत्तरों को याद कराया गया। इसके बाद वे अभ्यर्थी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में शामिल हुए।सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, इस कथित गड़बड़ी से कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला और उनमें से कुछ परीक्षा में सफल भी हुए।राजन कुमार की गिरफ्तारी के समय इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 11 हो गई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई।
छपरा से मनु कुमार सिंह की गिरफ्तारी
सीआईडी ने 24 सितंबर 2026 को बिहार के सारण जिले के छपरा से एजेंट मनु कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी को जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में उसकी भूमिका का संदेह था।
सीआईडी की कार्रवाई के दौरान परीक्षा में गड़बड़ी कराने वाले कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की गई। जांच में अभ्यर्थियों, बिचौलियों और परीक्षा संचालन से जुड़े व्यक्तियों के बीच संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
मनु कुमार सिंह की गिरफ्तारी के समय तक मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 33 तक पहुंच गई थी।इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े अन्य आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया भी तेज की।
परीक्षा संचालन एजेंसी के दो कर्मचारी रिमांड पर
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली की जांच के दौरान सीआईडी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल को गिरफ्तार किया था।दोनों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। सोमांश प्रकाश बिहार के रोहतास जिले के बिक्रमगंज का निवासी है, जबकि राहुल वैशाली जिले का रहने वाला बताया गया है।
सीआईडी ने दोनों को तीन दिनों की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री कथित तौर पर बाहरी व्यक्तियों तक कैसे पहुंची।
इस मामले में आईसीएन एजेंसी के संचालक मिथिलेश सिंह की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीआईडी को संदेह है कि परीक्षा से संबंधित जानकारी के कथित लीक होने में एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है।
अभ्यर्थियों तक कैसे पहुंचे प्रश्न और उत्तर?
पूरे मामले में जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर किस माध्यम से उपलब्ध कराए गए।जांच में यह जानकारी सामने आई है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया था। वहां उन्हें परीक्षा से संबंधित प्रश्नों और उनके जवाबों को याद कराने के आरोप लगे हैं।
सीआईडी की जांच में नेपाल और पश्चिम बंगाल से जुड़े कथित नेटवर्क का भी उल्लेख सामने आया है।अगस्त 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच में 28 अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर 135 प्रश्नों के उत्तर रटवाने का दावा किया गया था।
हालांकि जांच के विभिन्न चरणों में सामने आए प्रश्नों की संख्या और घटनाक्रम से जुड़े विवरण अलग-अलग हैं। इन तथ्यों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
500 सफल अभ्यर्थियों से भी हो चुकी पूछताछ
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा लगातार बढ़ा है।30 सितंबर 2026 तक सामने आई जानकारी के अनुसार, सीआईडी की विशेष जांच टीम लगभग 500 सफल अभ्यर्थियों के बयान दर्ज कर चुकी थी।
जांच एजेंसी ने परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मचारियों से भी पूछताछ की। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों और कथित बिचौलियों के बीच संपर्कों तथा परीक्षा से संबंधित जानकारी के आदान-प्रदान की परिस्थितियों को स्पष्ट करना है।सीआईडी प्राप्त जानकारी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
अब तक दर्जनों आरोपियों पर कार्रवाई
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में सीआईडी ने अभ्यर्थियों, एजेंटों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की है।सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 36 तक पहुंच गई थी।जांच के दौरान गिरिडीह, बोकारो और बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
हालांकि किसी आरोपी की गिरफ्तारी का अर्थ यह नहीं है कि उसके खिलाफ सभी आरोप सिद्ध हो चुके हैं। मामले में अपराध की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।
परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नों और उत्तरों की जानकारी मिलती है, तो इससे अन्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।इसी कारण परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री की सुरक्षा, परीक्षा संचालन एजेंसियों की जवाबदेही और अभ्यर्थियों के चयन की पारदर्शिता को महत्वपूर्ण माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामलाजेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं का मामला अदालतों तक भी पहुंच चुका है।
परीक्षा से जुड़ी शिकायतों को लेकर सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई हुई थी और अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई थी।इस बीच सीआईडी की जांच अलग से जारी रही और कथित गड़बड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
सीआईडी जांच में और खुलासों की संभावना
फिलहाल जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जांच एजेंसी अभ्यर्थियों, एजेंटों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।पटना के राजन कुमार और छपरा के मनु कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद बिहार तथा पश्चिम बंगाल से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
सीआईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा से पहले गोपनीय जानकारी किन लोगों तक पहुंची और किन अभ्यर्थियों को इसका अनुचित लाभ मिला।इस मामले में जांच पूरी होने के बाद ही आरोपियों की वास्तविक भूमिका और कथित अनियमितताओं के पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
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