दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली-NCR में महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

Ashish verma
8 Oct 2026 9:45 PM IST
दिल्ली-NCR में महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ सामने आई यौन अपराध की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस को राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभाव से बीट गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया है। विशेष रूप से स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी मजबूत करने को कहा गया है। इसके अलावा बस, कैब, टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों तथा सहायकों का सख्त सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना जरूरी है।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में हाल में सामने आई दुष्कर्म की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन तथा पुलिस की जिम्मेदारी है।
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि राजधानी में महिलाओं को रात के समय भी बिना किसी डर के बाहर निकलने का वातावरण मिलना चाहिए। अदालत ने पुलिस से कहा कि असामाजिक तत्वों में कानून का डर पैदा होना चाहिए, ताकि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोका जा सके।न्यायालय ने कहा कि अपराध होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ अपराध की रोकथाम पर भी गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास बढ़ाई जाएगी पुलिस गश्त
अदालत ने दिल्ली पुलिस को शिक्षण संस्थानों के आसपास बीट गश्त मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों के आसपास पुलिस की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा ऐसे स्थानों पर भी गश्त बढ़ाने को कहा गया है, जिन्हें सुरक्षा संबंधी समीक्षा में संवेदनशील पाया जाएगा। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को बीट कर्मचारियों के साथ नियमित बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।अदालत ने पुलिस नियंत्रण कक्ष की गाड़ियों यानी पीसीआर वाहनों की तैनाती और उनके ठहरने की व्यवस्था से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा करने को भी कहा है।
बस और कैब चालकों का होगा सख्त सत्यापन
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया है। अदालत ने सरकारी और निजी बसों के ड्राइवरों तथा सहायकों के सत्यापन को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं।इसके अलावा ओला, उबर, रैपिडो जैसी ऐप आधारित परिवहन सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों और निजी टैक्सी तथा ऑटो-रिक्शा चालकों का भी सत्यापन किया जाएगा।
अदालत ने निर्देश दिया कि यात्रियों को वाहन में चालक और संबंधित सहायक की पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए सत्यापित चालक का नाम और फोटो यात्रियों को दिखाई देने वाले स्थान पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए।इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवहन सेवाओं में अनधिकृत व्यक्ति वाहन न चलाएं।
सीसीटीवी और खराब स्ट्रीट लाइटों पर भी ध्यान
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्थानों की स्थिति सुधारने को आवश्यक बताया है। अदालत ने अंधेरे रास्तों, खराब स्ट्रीट लाइटों और निगरानी की कमी वाले इलाकों को लेकर चिंता जताई।
न्यायालय ने संवेदनशील स्थानों की पहचान करने, वहां रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने और सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की समीक्षा करने को कहा है।इसके अलावा खराब बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कमियों को जल्द दूर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की कमी से अपराधियों को अवसर मिल सकता है।
आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद अदालत ने लिया संज्ञान
दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ सामने आई घटनाओं ने सुप्रीम कोर्ट की चिंता बढ़ाई है।इनमें दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म, स्वरूप नगर क्षेत्र में एक किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही स्लीपर बस में नाबालिग के यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है।
इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने 28 सितंबर को स्वतः संज्ञान की कार्यवाही शुरू की थी। न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाए थे।
पुलिस गश्त की निगरानी के लिए कमांड सेंटर पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस गश्त और सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।अदालत ने पुलिस गश्त की निगरानी के लिए कमांड सेंटर या विशेष नियंत्रण व्यवस्था की आवश्यकता बताई है। इसके माध्यम से गश्ती वाहनों की गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा सकेगी।
अदालत ने क्यूआर कोड आधारित गश्त निगरानी व्यवस्था की व्यवहार्यता पर भी रिपोर्ट मांगी है। इस व्यवस्था में समय और स्थान से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पुलिस गश्त की पुष्टि करने का प्रस्ताव है।
स्थानीय लोगों की शिकायतों पर भी होगा ध्यान
शीर्ष अदालत ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन को नागरिकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की आवश्यकता बताई है।इसके तहत आवासीय क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और छात्राओं के पीजी आवासों के आसपास सुरक्षा संबंधी समस्याओं की जानकारी जुटाने पर जोर दिया गया है।अदालत ने अधिकारियों से स्थानीय लोगों के साथ नियमित बैठक करने और प्राप्त शिकायतों पर की गई कार्रवाई की निगरानी करने को कहा है।
16 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा उपायों के अनुपालन की रिपोर्ट तथा हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।अदालत के निर्देशों के तहत दिल्ली पुलिस और प्रशासन को महिला सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।
महिला सुरक्षा के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी
सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा केवल कागजी निर्देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देना चाहिए।
अब दिल्ली पुलिस और संबंधित विभागों के सामने शिक्षण संस्थानों के आसपास गश्त बढ़ाने, परिवहन चालकों का सत्यापन करने, सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी है।
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