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समुद्र में भारतीय तटरक्षक बल का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

Ratna Netam
8 Oct 2026 9:40 PM IST
समुद्र में भारतीय तटरक्षक बल का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
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नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने समुद्र में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान चलाने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए गुरुवार, 8 अक्टूबर को ओडिशा के पारादीप तट के पास 12वें राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास 'SAREX-2026' का आयोजन किया। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल सहित कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने भाग लिया। अभ्यास के दौरान समुद्र में एक यात्री विमान की आपातकालीन लैंडिंग और मालवाहक जहाज से टकराने जैसी काल्पनिक आपदा की स्थिति तैयार की गई। इसके माध्यम से समुद्र में फंसे लोगों को बचाने, आग बुझाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (NMSARB) की देखरेख में आयोजित किया गया। इस वर्ष अभ्यास की थीम 'खोज एवं बचाव की तैयारियों और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग' रखी गई थी। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक की सहायता से समुद्री आपदाओं के दौरान तेज, प्रभावी और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की क्षमता का परीक्षण करना था।
इस महत्वपूर्ण अभ्यास की समीक्षा भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। इसमें भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, नौवहन महानिदेशालय, मत्स्य पालन विभाग, सीमा शुल्क विभाग, मरीन पुलिस, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और ओडिशा राज्य प्रशासन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।अभ्यास की विशेषता अंतरराष्ट्रीय भागीदारी रही। इसमें 30 देशों के 32 पर्यवेक्षक शामिल हुए। इन प्रतिनिधियों ने समुद्री खोज और बचाव अभियान की तैयारियों का अवलोकन किया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी से समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने, अनुभव साझा करने और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करने का अवसर मिला।
SAREX-2026 के दौरान समुद्र में एक बड़े बचाव अभियान का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया। इसके अनुसार, 228 लोगों को लेकर जा रहा एक यात्री विमान पारादीप बंदरगाह के पास समुद्र में आपातकालीन लैंडिंग करता है। इसी दौरान विमान का मुख्य हिस्सा 'एमवी जुम्बा' नामक कंटेनर जहाज से टकरा जाता है, जिससे जहाज को संरचनात्मक नुकसान पहुंचता है और उसमें आग लग जाती है।इस काल्पनिक दुर्घटना के आधार पर एक साथ विमान और जहाज से जुड़े संकट से निपटने का अभ्यास किया गया। इसमें समुद्र में फंसे लोगों की पहचान, बचाव दलों की तैनाती, आग बुझाने की कार्रवाई और घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने जैसी गतिविधियां शामिल थीं। यह वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि बचाव तैयारियों के परीक्षण के लिए तैयार किया गया अभ्यास था।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस अभियान में भारतीय तटरक्षक बल के 15 जहाज, तीन डोर्नियर विमान, तीन एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और एक चेतक हेलीकॉप्टर शामिल किए गए। इसके अतिरिक्त भारतीय वायुसेना के C-130J और Mi-17 विमान तथा भारतीय नौसेना के दो जहाज भी अभ्यास में शामिल हुए। नागरिक एजेंसियों, राज्य प्रशासन और तटीय सहायता इकाइयों ने भी अभियान में सहयोग किया।अभ्यास के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव कार्यों का नेतृत्व और नियंत्रण करने के लिए विशेष कमांड पोस्ट सक्रिय की गई। इसके माध्यम से विभिन्न एजेंसियों के बीच संपर्क स्थापित कर राहत और बचाव गतिविधियों का समन्वय किया गया।
समुद्र में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की सहायता से निकासी, लाइफ राफ्ट की तैनाती और हवाई माध्यम से बचाव उपकरण गिराने जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा जेसन क्रैडल, जेमिनी रिकवरी, रेस्क्यू बास्केट और स्क्रैम्बल नेट जैसी विशेष बचाव तकनीकों का भी अभ्यास किया गया।जेसन क्रैडल और रेस्क्यू बास्केट जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग समुद्र में फंसे व्यक्तियों को जहाज पर सुरक्षित चढ़ाने के लिए किया जाता है। वहीं, हेलीकॉप्टर की मदद से उन स्थानों पर भी बचाव अभियान चलाया जा सकता है, जहां जहाजों का तत्काल पहुंचना कठिन होता है।
इस अभ्यास में रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) की क्षमता का भी प्रदर्शन किया गया। यह तकनीक समुद्र के भीतर निगरानी और विभिन्न प्रकार की जांच संबंधी गतिविधियों में उपयोगी होती है। आधुनिक उपकरणों के प्रयोग का उद्देश्य समुद्री खोज एवं बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना हैSAREX-2026 से पहले बुधवार, 7 अक्टूबर को भुवनेश्वर में 24वीं राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड की बैठक भी आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। इसमें भारत के लगभग 46 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले समुद्री खोज एवं बचाव क्षेत्र में आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान तकनीकी एकीकरण, वास्तविक समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान, आपातकालीन संदेशों का प्रबंधन, जहाजों की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने पूर्व में संचालित बचाव अभियानों से मिले अनुभवों को भविष्य की तैयारियों में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।इससे पहले रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 7 अक्टूबर को SAREX-2026 का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सरकार के विभिन्न विभागों, सुरक्षा बलों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।
संजय सेठ ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ समुद्री खोज एवं बचाव क्षमताओं को भी आधुनिक बनाना जरूरी है। उन्होंने तेज, सटीक और प्रभावी बचाव व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने भी समुद्र में बचाव अभियानों के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समुद्र में संकटग्रस्त लोगों की जान बचाने के दौरान राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने विदेशी पर्यवेक्षकों की भागीदारी को भविष्य के संयुक्त बचाव अभियानों के लिए उपयोगी बताया।
समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि समुद्र में दुर्घटना होने पर सहायता पहुंचाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खराब मौसम, दूरी, संचार संबंधी कठिनाइयों और सीमित समय जैसी परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय आवश्यक होता है।पारादीप तट के पास आयोजित इस अभ्यास में इसी प्रकार की जटिल परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया। विमान दुर्घटना और जहाज में आग लगने की काल्पनिक स्थिति के माध्यम से बचाव दलों की प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन किया गया।
आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय तटरक्षक बल ने इस अभ्यास को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें शामिल जहाजों, विमानों और बचाव दलों ने समन्वित तरीके से अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।SAREX-2026 के माध्यम से भारत ने समुद्री आपदाओं से निपटने के लिए तकनीक आधारित और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ी बचाव व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। यह अभ्यास भारत के 'सागर' और 'महासागर' दृष्टिकोण के अनुरूप समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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