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GST काउंसिल की बैठक में कर्नाटक की दो बड़ी मांगें मंजूर
Ratna Netam
8 Oct 2026 9:44 PM IST

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नई दिल्ली :8 अक्टूबर 2026। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की बैठक के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की ओर से उठाए गए दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर जीएसटी परिषद ने सकारात्मक रुख अपनाया है। शिवकुमार ने विशेष रूप से जीएसटी का भुगतान नहीं करने वाले व्यापारियों और उद्यमियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने तथा गिरफ्तारी की कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कर वसूली के मामलों में अधिकारियों का प्राथमिक उद्देश्य बकाया राजस्व प्राप्त करना होना चाहिए, न कि कारोबारियों को अनावश्यक रूप से हिरासत में लेना।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि जीएसटी परिषद की बैठक सकारात्मक रही और कर्नाटक की मांगों को स्वीकार किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर कानूनों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों में डालना उचित नहीं है।
जीएसटी वसूली के लिए गिरफ्तारी जरूरी नहीं
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि जीएसटी का भुगतान नहीं करने वाले कारोबारियों से बकाया राशि वसूलने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने आयकर अधिनियम का उदाहरण देते हुए कहा कि जीएसटी से जुड़े मामलों में भी उसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।शिवकुमार ने कहा, "जीएसटी बैठक बहुत अच्छी रही। कर्नाटक के दो अहम मुद्दे थे और उन्होंने दोनों को मान लिया है। एक मुद्दा आपराधिक मामलों और जीएसटी न चुकाने पर लोगों की गिरफ्तारी से जुड़ा था। इनकम टैक्स में इसके लिए प्रावधान है। हमें उसी का पालन करना चाहिए।"उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों का कारोबारियों को बेवजह गिरफ्तार करना सही नहीं है। जिन लोगों पर टैक्स की राशि बकाया है, उनसे नियमानुसार पैसा वसूल किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी जैसी सख्त कार्रवाई के इस्तेमाल को भी समाप्त करने की वकालत की।शिवकुमार के मुताबिक, कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे सरकारी राजस्व की वसूली सुनिश्चित हो और उद्यमियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
जीएसटी परिषद ने गिरफ्तारी के अधिकारों में किया बदलाव
गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कर प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई। परिषद ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों को समाप्त करने की सिफारिश की है। साथ ही आपराधिक अभियोजन शुरू करने की मौद्रिक सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का फैसला लिया गया।सरकारी जानकारी के अनुसार, देरी से रिटर्न दाखिल करने, भुगतान में चूक या सामान्य त्रुटियों वाले मामलों में कर वसूली, ब्याज और अनुपातिक जुर्माने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। सजा या जुर्माने से जुड़े मामलों में न्यायिक विवेक की भूमिका को भी महत्व दिया गया है।इन बदलावों का उद्देश्य कर नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को राहत देना और जीएसटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।
छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को राहत देने पर जोर
शिवकुमार ने अपने बयान में व्यापारियों के साथ प्रशासनिक व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को अनावश्यक गिरफ्तारी के डर से मुक्त रखना जरूरी है।उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब देशभर में जीएसटी नियमों को सरल बनाने और करदाताओं की परेशानियों को कम करने पर चर्चा चल रही है।जीएसटी परिषद ने अपनी बैठक में पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड और कर विवादों के निपटारे से संबंधित प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।परिषद ने जीएसटी नोटिस और कानूनी कार्यवाही के लिए समान मानक अपनाने की भी सिफारिश की है।
कर्नाटक ने बैठक में मजबूती से रखा अपना पक्ष
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने जीएसटी परिषद की बैठक में राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उनका कहना था कि परिषद ने राज्य की चिंताओं को गंभीरता से लिया और उन पर सकारात्मक निर्णय किया।उन्होंने बताया कि जीएसटी भुगतान न होने पर गिरफ्तारी तथा आपराधिक कार्रवाई से संबंधित मुद्दा राज्य की प्रमुख मांगों में शामिल था।शिवकुमार ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि करदाताओं से बकाया राशि प्राप्त करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रह और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाकर चलना जरूरी है।कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित उनकी टिप्पणी को जीएसटी प्रशासन में प्रस्तावित सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
जीएसटी परिषद की बैठक में करदाताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रियागत सुधारों पर चर्चा की गई। इन सुधारों का प्रमुख उद्देश्य कर संबंधी विवादों को कम करना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को स्पष्ट करना और करदाताओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाना है।कर व्यवस्था में गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई को सीमित करने से व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कर चोरी और अन्य गंभीर मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की व्यवस्था बनी रहेगी।शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को अपने अधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी से करना चाहिए। उनका कहना था कि कर संग्रह की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे व्यापारी नियमों का पालन कर सकें और प्रशासन के साथ उनका विश्वास बना रहे।
जीएसटी सुधारों से कारोबारी माहौल बेहतर होने की उम्मीद
जीएसटी परिषद के हालिया निर्णयों को व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परिषद ने कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि मौजूदा कर व्यवस्था की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बैठक के परिणामों पर संतोष जताते हुए कहा कि राज्य की प्रमुख चिंताओं का समाधान किया गया है। उनका स्पष्ट संदेश था कि टैक्स बकाया होने पर सरकार को वसूली करनी चाहिए, लेकिन व्यापारियों को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार करना उचित नहीं है।जीएसटी परिषद की सिफारिशों को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी होंगी। ऐसे में इन सुधारों के वास्तविक प्रभाव का आकलन उनके क्रियान्वयन के बाद ही किया जा सकेगा।
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