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जहाजों पर हमलों के खिलाफ भारत और लाइबेरिया का कड़ा रुख

SHIDDHANT
8 Oct 2026 9:49 PM IST
जहाजों पर हमलों के खिलाफ भारत और लाइबेरिया का कड़ा रुख
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Delhi दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में पिछले कुछ दिनों से वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत और लाइबेरिया ने कड़ी निंदा की है। दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि समुद्री व्यापार को बाधित करने और निर्दोष लोगों की जान लेने वाली ऐसी घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए इन हमलों को तत्काल रोकने की मांग की गई है।
भारत और लाइबेरिया समुद्री जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा के लिए गठित 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स' (GoF on S4) के सह-अध्यक्ष हैं। दोनों देशों ने संयुक्त बयान में खाड़ी क्षेत्र, उसके आसपास के समुद्री इलाकों और काला सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है।
बयान में कहा गया कि समुद्री जहाजों पर हमले अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने के साथ जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। इन घटनाओं में निर्दोष लोगों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत और लाइबेरिया ने हमलों में जान गंवाने वाले नाविकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। साथ ही घायल नाविकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
दोनों देशों ने कहा कि समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। जहाजों और उनके चालक दल को हिंसक घटनाओं से सुरक्षित रखना सभी संबंधित पक्षों की साझा जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि भारत और लाइबेरिया ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में GoF on S4 पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य समुद्री व्यापार, जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
हाल के दिनों में काला सागर में कई व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। भारत ने इन घटनाओं को लेकर पहले भी चिंता जताई थी। विदेश मंत्रालय ने जहाजों और नाविकों को निशाना बनाने की घटनाएं तत्काल रोकने की अपील की थी। भारत और लाइबेरिया ने स्पष्ट किया कि दोनों देश भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने और नाविकों के अधिकारों की रक्षा के लिए समन्वय बढ़ाने को तैयार हैं।
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