हिमाचल प्रदेश

Shimla: ग्लेशियर पिघलने से पार्वती नदी में बाढ़ का खतरा

Sarita
22 Feb 2025 8:15 AM IST
Shimla:  ग्लेशियर पिघलने से पार्वती नदी में बाढ़ का खतरा
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Shimla शिमला: हिमाचल प्रदेश में ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमाचल के ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं। यानि तेजी से पिघल रहे हैं। इससे जहां पार्वती नदी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, वहीं ग्लेशियर झीलों वासुकी और सांगला का आकार भी बढ़ गया है, जो चिंता का विषय है। वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2024 में वासुकी का क्षेत्रफल 3.02 हेक्टेयर और सांगला का 0.87 हेक्टेयर बढ़ गया है। यह खुलासा ग्लेशियर झीलों वासुकी, सांगला के बैथीमेट्री सर्वे और सामरिक महत्व की सड़कों पर भूस्खलन के खतरे के आकलन पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट में हुआ, जिसे शुक्रवार को मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने जारी किया। कुल्लू जिले के सोसन में 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर झील वासुकी और किन्नौर जिले के सांगला में 4710 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर झील सांगला का गहन अध्ययन करने के बाद सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों द्वारा बैथीमेट्री सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार की गई है। इन जोखिम भरी ग्लेशियर झीलों के लिए बैथीमेट्री सर्वेक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार ये दोनों झीलें बदलते मौसम, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने के कारण बनी हैं।
ग्लेशियर झील वासुकी 1.65 किलोमीटर की परिधि में है। इसकी अधिकतम गहराई 36.91 मीटर और औसत गहराई 14.48 मीटर है। इसके अलावा ग्लेशियर झील वासुकी का क्षेत्रफल 2017 से 2024 के बीच 3.02 हेक्टेयर बढ़ा है। 2017 में वासुकी का क्षेत्रफल 10.36 हेक्टेयर था, जो 2024 में बढ़कर 13.38 हेक्टेयर हो गया। झील में 2.16605135 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्वती नदी को बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील बताया गया है। क्योंकि ग्लेशियरों के लगातार पिघलने से नदी में पानी का बहाव बढ़ सकता है। हालांकि वासुकी झील से अभी पानी का रिसाव नहीं हुआ है, जो राहत की बात है। इसी तरह सांगला झील का क्षेत्रफल वर्ष 2017 से 2024 के बीच 0.87 हेक्टेयर बढ़ा है।
वर्ष 2017 में सांगला झील का क्षेत्रफल 13.4 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 14.29 हेक्टेयर हो गया है। सितंबर माह में सर्वेक्षण के दौरान झील का क्षेत्रफल 15.73 हेक्टेयर पाया गया था। झील में 1.52758 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी है। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा, निदेशक एवं विशेष सचिव आपदा प्रबंधन डीसी राणा, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राघव शर्मा, पुलिस अधीक्षक एसडीआरएफ अर्जित सेन ठाकुर, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग अजय कपूर, मुख्य अभियंता ऊर्जा विभाग डीपी गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि ग्लेशियल लेक सांगला के फटने से जेएसडब्ल्यू, बस्पा हाइडल पावर स्टेशन प्रभावित हो सकता है। सांगला में जान-माल के नुकसान की भी आशंका है। बस्पा नदी तंत्र में ग्लेशियल लेक सांगला की अहम भूमिका है। यह झील अपने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के लिए भी मशहूर है। यह झील जीवों की कई प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है।
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