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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में एक दशक की मेहनत के बाद तैयार की गई कर्नल शेरजंग ईको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) योजना अब प्रक्रियागत शॉर्टकट के कारण समाप्त हो गई है। यह कदम स्थानीय प्रशासन और पर्यावरणीय समुदाय के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।
जानकारी के अनुसार, कर्नल शेरजंग ESZ योजना को तैयार करने में राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने दस वर्षों तक काम किया था। इस दौरान पर्यावरणीय प्रभाव, स्थानीय आबादी की भागीदारी और भूमि उपयोग की विस्तृत जांच की गई थी। योजना का उद्देश्य क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और भविष्य में विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना था।
हालांकि, हाल ही में यह पता चला कि योजना को अंतिम रूप देने में कुछ प्रक्रियागत शॉर्टकट अपनाए गए थे। इस वजह से पर्यावरण मंत्रालय ने योजना को निरस्त कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि नियमों और मानकों का पालन न होने के कारण ESZ को वैध रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
स्थानीय और पर्यावरणीय समूहों ने इस कदम पर निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में संरक्षण और सतत विकास की दिशा में की गई मेहनत अब अधूरी रह गई। कई विशेषज्ञों ने कहा कि यदि योजना सही प्रक्रिया और नियमों का पालन करते हुए पूरी होती, तो यह हिमाचल में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मिसाल बन सकती थी।
सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ESZ जैसे परियोजनाओं के लिए अधिक पारदर्शिता और सख्त प्रक्रियागत पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय नियमों का पालन सुनिश्चित करने और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी से बचने के लिए लिया गया।
पर्यावरणविदों का कहना है कि इस क्षेत्र में स्थायी और जिम्मेदार परियोजनाओं की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में ESZ योजना बनाने से पहले सभी कानूनी और पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए।
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