हरियाणा

महेंद्रगढ़ में निजी स्कूलों पर सख्ती, नए प्रवेश बंद

Saba Naaz
14 July 2026 2:58 PM IST
महेंद्रगढ़ में निजी स्कूलों पर सख्ती, नए प्रवेश बंद
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नारनौल। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के नियमों की अनदेखी करना महेंद्रगढ़ जिले के 33 निजी स्कूलों को भारी पड़ गया है। हरियाणा शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों का एमआईएस (Management Information System) पोर्टल बंद कर दिया है। इसके चलते इन स्कूलों में नए विद्यार्थियों के दाखिले पूरी तरह रुक गए हैं। विभाग की कार्रवाई के बाद सात जुलाई से इन स्कूलों में नए छात्रों का पंजीकरण, प्रवेश प्रक्रिया और कक्षा आवंटन नहीं हो पा रहा है। इससे अभिभावकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में ऐसे 1107 निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की है।

25 प्रतिशत आरक्षित सीटों की जानकारी नहीं दी

जानकारी के अनुसार, आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। इन सीटों से संबंधित जानकारी स्कूलों को एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध करानी होती है। आरोप है कि महेंद्रगढ़ जिले के इन 33 निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों का विवरण पोर्टल पर अपडेट नहीं किया। इसके अलावा कुछ स्कूलों ने मान्यता से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध नहीं कराए। इसके बाद शिक्षा विभाग ने नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के एमआईएस पोर्टल को बंद करने की कार्रवाई की।

नए छात्रों का पंजीकरण हुआ बंद

एमआईएस पोर्टल बंद होने के कारण संबंधित स्कूल अब नए विद्यार्थियों का ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही नए दाखिले और कक्षा आवंटन की प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई है। स्कूल संचालकों और अभिभावकों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन गई है। कई अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए स्कूलों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पोर्टल बंद होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

पहले से पढ़ रहे छात्रों को मिली राहत

शिक्षा विभाग ने हालांकि इन स्कूलों को पूरी तरह बंद नहीं किया है। वर्तमान में इन स्कूलों को केवल पहले से अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) जारी करने की अनुमति दी गई है। यानी पुराने छात्रों से संबंधित जरूरी कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन नए विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं लिया जा सकता।

विभाग ने नियमों के पालन पर दिया जोर

शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई अधिनियम का पालन करना सभी निजी स्कूलों की जिम्मेदारी है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आरक्षित सीटों की जानकारी और अन्य जरूरी रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो स्कूल निर्धारित नियमों को पूरा करेंगे और जरूरी जानकारी पोर्टल पर अपडेट करेंगे, उनके एमआईएस पोर्टल को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।

अभिभावकों की बढ़ी चिंता

दाखिला प्रक्रिया रुकने के कारण अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों के प्रवेश को लेकर कई परिवार परेशान हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की लापरवाही का असर बच्चों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। फिलहाल शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद सभी संबंधित निजी स्कूलों को आरटीई नियमों का पालन करने और लंबित जानकारी जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की निगरानी के बाद ही इन स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकेगी।

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