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HC सख्त: आरोपी की कस्टोडियल पूछताछ जरूरी

Saba Naaz
14 July 2026 2:31 PM IST
HC सख्त: आरोपी की कस्टोडियल पूछताछ जरूरी
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चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कनाडा भेजने का झांसा देकर 14.40 लाख रुपये की कथित ठगी करने के आरोपी साहिल शर्मा को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए उसकी कस्टोडियल इंटरोगेशन (हिरासत में पूछताछ) बेहद जरूरी है। जस्टिस आलोक जैन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और जांच एजेंसी को पूछताछ के जरिए कई महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाना है। अदालत ने माना कि इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत जैसी राहत देना उचित नहीं होगा।

एक साल से फरार था आरोपी

मामले में आरोपी साहिल शर्मा पर आरोप है कि उसने कनाडा भेजने का वादा कर एक व्यक्ति से 14.40 लाख रुपये लिए थे। शिकायत के आधार पर करनाल में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद से आरोपी फरार चल रहा था। आरोपी ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। उसने अदालत से गिरफ्तारी से राहत देने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने उसके फरार रहने और जांच में सहयोग नहीं करने के पहलू को भी गंभीरता से लिया।

आरोपी ने बताया पैसों का विवाद

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि यह मामला मूल रूप से पैसों के लेन-देन का विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दे दिया गया है। आरोपी ने दावा किया कि वह शिकायतकर्ता की रकम वापस करने के लिए तैयार था, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण भुगतान में देरी हो गई। आरोपी पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए, ताकि वह जांच में सहयोग कर सके।

कोर्ट ने माना पूछताछ जरूरी

वहीं, पुलिस और शिकायतकर्ता पक्ष ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी पर गंभीर धोखाधड़ी के आरोप हैं और वह लंबे समय से फरार था। ऐसे में बिना हिरासत में लिए जांच पूरी करना मुश्किल होगा। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामले में आरोपी की भूमिका, आरोपों की प्रकृति और जांच की जरूरत को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को इस चरण पर अग्रिम जमानत देने का कोई उचित आधार नहीं बनता। इसके बाद हाई कोर्ट ने साहिल शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

विदेश भेजने के नाम पर बढ़ रहे ठगी के मामले

गौरतलब है कि विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई मामलों में एजेंट और फर्जी इमिग्रेशन सलाहकार लोगों से लाखों रुपये लेकर उन्हें विदेश भेजने का झांसा देते हैं। बाद में न तो वीजा मिलता है और न ही रकम वापस की जाती है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आरोपी से दस्तावेज, पैसों के लेन-देन और अन्य संबंधित जानकारी जुटाने के लिए हिरासत में पूछताछ को जरूरी मानती हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का यह फैसला ऐसे मामलों में जांच प्रक्रिया को मजबूत करने और गंभीर आर्थिक अपराधों में आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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