हरियाणा
रेवाड़ी में प्रदूषण का रेड अलर्ट, गंभीर श्रेणी में पहुंचा AQI
Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 6:30 PM IST

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रेवाड़ी। हरियाणा के रेवाड़ी जिले में लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण आम लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। शहर की आबोहवा खराब होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों से निकलता धुआं और निर्माण गतिविधियों के कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव करने के निर्देश हैं, लेकिन कई इलाकों में इन व्यवस्थाओं के प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
रेवाड़ी में पिछले कुछ दिनों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को शहर का एक्यूआई 289 था, जबकि मंगलवार को यह 241 दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम एक्यूआई 310 तक पहुंच गया, जो इस मौसम में दर्ज सबसे अधिक स्तर बताया गया। भारतीय मानकों के अनुसार 301 से 400 के बीच एक्यूआई को 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद प्रशासन ने ग्रैप-2 के तहत कई प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य वातावरण में धूल और धुएं की मात्रा कम करना है। इसके अंतर्गत प्रमुख सड़कों पर नियमित रूप से मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जानी है। इसके बावजूद शहर की कई सड़कों पर धूल उड़ने की समस्या बनी हुई है।सड़कों पर लगातार गुजरने वाले वाहनों के कारण जमा धूल हवा में फैल जाती है। विशेष रूप से भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल के गुबार उठने से आसपास के दुकानदारों, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़क किनारे जमा मिट्टी और निर्माण सामग्री भी प्रदूषण बढ़ाने का कारण बन रही है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए पानी का नियमित छिड़काव महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है। इससे सड़क की सतह पर मौजूद धूल को हवा में उड़ने से कुछ हद तक रोका जा सकता है। हालांकि, यह स्थायी समाधान नहीं है। इसके साथ सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण सामग्री को ढककर रखना और वाहनों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण भी जरूरी है।वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों में भी सड़कों की मशीनों से सफाई, धूल के वैज्ञानिक निस्तारण और पानी के छिड़काव पर जोर दिया गया है। आयोग के अनुसार, सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए संबंधित एजेंसियों को इन व्यवस्थाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित करना चाहिए।
रेवाड़ी में प्रदूषण बढ़ने की एक वजह निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल भी मानी जा रही है। कई स्थानों पर निर्माण सामग्री खुले में रखे जाने और उसे बिना ढके वाहनों में ले जाने से धूल वातावरण में फैलती है। ग्रैप के तहत ऐसी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के निर्देश हैं, लेकिन नियमों के पालन में कमियां सामने आई हैं।प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई भी शुरू की है। जानकारी के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने के मामले में शहर की चार निर्माण साइटों पर काम बंद करवाया गया है, जबकि दो अन्य निर्माण स्थलों को नोटिस जारी किए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ सुधीर के अनुसार, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि एनसीआर में 5 नवंबर से 20 नवंबर तक धूल पैदा करने वाली बाहरी निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।वायु प्रदूषण का असर सबसे अधिक बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है। अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए प्रदूषित हवा विशेष रूप से नुकसानदायक होती है। हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे खांसी, गले में जलन, आंखों में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण अधिक होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। सुबह और शाम के समय खुले में व्यायाम करने वालों को भी वायु गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए। जिन लोगों को पहले से सांस संबंधी बीमारी है, उन्हें चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाइयां जारी रखनी चाहिए।शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करना है। केवल आदेश जारी करने से प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता। इसके लिए सड़क सफाई मशीनों का नियमित संचालन, पर्याप्त पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों की निगरानी और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जरूरी है।
इसके अलावा, खुले में कचरा जलाने, कोयले और लकड़ी के अनावश्यक इस्तेमाल तथा बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों पर भी सख्ती बरतनी होगी। नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। लोगों को निर्माण सामग्री खुले में नहीं छोड़नी चाहिए और कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों से बचना चाहिए।रेवाड़ी में खराब होती वायु गुणवत्ता ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए योजनाओं के साथ उनका जमीनी क्रियान्वयन भी जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में लोगों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल शहरवासियों को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल और नियमित निगरानी की आवश्यकता है।
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