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Haryana: हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। यह टास्क फोर्स पीएनडीटी एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने का काम करेगी। कन्या भ्रूण हत्या और गर्भ में भ्रूण की जांच के मामलों को रोकने में भी टास्क फोर्स विशेष भूमिका निभाएगी। फोर्स में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा के महानिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग के महानिदेशक, आयुष महानिदेशक, पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) के निदेशक बतौर सदस्य शामिल हैं।
इस सप्ताह 23 एमटीपी केंद्रों को नोटिस जारी कर उन्हें बंद करने का कारण बताओ नोटिस दिया है। पिछले दो महीनों में 17 ऑनलाइन एमटीपी किट विक्रेताओं के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की हैं। पिछले तीन महीनों में 23 पीएनडीटी छापे मारे गए। इन केंद्रों को बंद कर दिया है। हिसार के नोडल अधिकारी (पीएनडीटी) को निलंबित किया है। 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के प्रभारी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
एसटीएफ में स्वास्थ्य विभाग, राज्य औषधि नियंत्रक और पुलिस विभाग को भी शामिल किया हुआ है। एनएचएम के निदेशक डॉ़ वीरेंद्र यादव एसटीएफ के संयोजक बनाए गये हैं। डॉ़ वीरेंद्र यादव ने बताया कि एसटीएफ राज्य में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम को सख्ती से लागू कर रही है। इसके परिणामस्वरूप हरियाणा में 1500 मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) केंद्रों में से 300 के पंजीकरण रद्द किए हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अपने लाइसेंस वापस लिए हैं।
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