हरियाणा

हरियाणा रोडवेज की हड़ताल टली, कई मांगों पर बनी सहमति

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 3:59 PM IST
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल टली, कई मांगों पर बनी सहमति
x
चंडीगढ़। हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में राहत भरी खबर सामने आई है। कर्मचारियों ने अपनी प्रस्तावित हड़ताल को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में कई मांगों पर सहमति बनने के बाद यह निर्णय लिया गया। हड़ताल स्थगित होने से प्रदेश में रोडवेज बसों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कर्मचारियों की कुछ मांगें अभी भी लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए आगे बातचीत जारी रहने की बात सामने आई है।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 5 और 6 नवंबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार के साथ पहले हुई बातचीत में कई मांगों पर सहमति बनने के बावजूद उन्हें लागू करने के आदेश जारी नहीं किए गए। इसी नाराजगी के चलते कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया था।
सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई बैठक
जानकारी के अनुसार, हड़ताल को देखते हुए हरियाणा सरकार ने कर्मचारी संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। बुधवार, 4 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सचिवालय में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारी साझा मोर्चा के प्रतिनिधियों के बीच बैठक निर्धारित की गई थी।
इस बैठक में कर्मचारियों की लंबित मांगों और पूर्व में दिए गए आश्वासनों पर चर्चा की जानी थी। बातचीत का उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालना और प्रदेश में परिवहन सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना था।हड़ताल स्थगित होने की सूचना के अनुसार, वार्ता में कई मुद्दों पर सहमति बनने के बाद कर्मचारी संगठनों ने फिलहाल आंदोलन रोकने का निर्णय लिया है। हालांकि सहमति के सभी बिंदुओं का विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध होना बाकी है।
5 और 6 नवंबर को प्रस्तावित थी हड़ताल
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा ने पहले ही घोषणा की थी कि यदि सरकार ने 4 नवंबर तक उनकी मांगों को लागू नहीं किया तो 5 और 6 नवंबर को प्रदेशभर में बसों का चक्का जाम किया जाएगा।
इस आंदोलन में हरियाणा रोडवेज के लगभग 20 हजार कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना जताई गई थी। प्रदेश के 24 डिपो और 13 सब-डिपो में बस सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका थी।कर्मचारियों की हड़ताल से रोजाना सफर करने वाले विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और ग्रामीण यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती थी।विशेष रूप से उन इलाकों में अधिक असर पड़ने की संभावना थी, जहां सार्वजनिक परिवहन का प्रमुख साधन हरियाणा रोडवेज की बसें हैं।ऐसे में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का सकारात्मक परिणाम सामने आना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कर्मचारियों की इन मांगों को लेकर था विवाद
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी लंबे समय से वेतन, भत्तों, पदोन्नति और नियमित भर्ती से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में चालक और परिचालकों के वेतनमान में सुधार, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, लंबित बोनस का भुगतान और कर्मचारियों को विभिन्न भत्तों का लाभ देना शामिल है।इसके अतिरिक्त वर्ष 2016 में भर्ती चालकों को नियमित करने, वर्ष 2008 में नियुक्त परिचालकों की पदोन्नति, अर्जित अवकाश की बहाली और ओवरटाइम से जुड़े मुद्दों का समाधान करने की भी मांग उठाई गई थी।कर्मचारी संगठनों ने परिवहन विभाग में निजीकरण और निजी बस परमिट बढ़ाने की योजनाओं का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकारी बस सेवाओं को मजबूत करने के लिए रोडवेज के बेड़े में नई बसें शामिल की जानी चाहिए।कर्मचारियों का तर्क है कि यदि विभाग में पर्याप्त संख्या में चालक, परिचालक और तकनीकी कर्मचारी नियुक्त किए जाएं तो यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिल सकेंगी।
सितंबर में भी बनी थी कई मांगों पर सहमति
इस विवाद की शुरुआत हालिया हड़ताल की घोषणा से नहीं हुई थी। इससे पहले 8 सितंबर को हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई थी।उस बैठक में कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की जानकारी दी गई थी। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, सरकार ने सहमत मांगों को लागू करने के लिए एक महीने के भीतर संबंधित आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था।लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कुछ मांगों के संबंध में आदेश जारी नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई।इसके बाद साझा मोर्चा ने सरकार को 4 नवंबर तक का समय देते हुए दो दिवसीय हड़ताल की चेतावनी दी थी।कर्मचारी संगठनों का कहना था कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। वे मांगों के संबंध में स्पष्ट आदेश और समयबद्ध क्रियान्वयन चाहते हैं।
हिसार और सिरसा में प्रभावित हुई थीं बस सेवाएं
राज्यव्यापी हड़ताल से पहले ही हरियाणा के कुछ जिलों में कर्मचारियों का आंदोलन शुरू हो गया था।हिसार में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई बस सेवाएं प्रभावित हुई थीं। कर्मचारियों ने लंबित यात्रा भत्ते, चिकित्सा बिल और अन्य भुगतान संबंधी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।वहीं, सिरसा में भी कर्मचारियों के आंदोलन से बसों का संचालन प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं। कई रूटों पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।हिसार में विभागीय अधिकारियों ने कर्मचारियों से बातचीत कर बकाया भुगतान के लिए बजट उपलब्ध होने की जानकारी दी थी।इन घटनाओं के बाद आशंका बढ़ गई थी कि प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू होने पर परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल स्थगित होने से सबसे अधिक राहत आम यात्रियों को मिलने की उम्मीद है।हरियाणा रोडवेज प्रदेश के शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन सेवा है।प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने, कर्मचारी कार्यालय जाने और आम लोग जरूरी कामों के लिए सरकारी बसों का उपयोग करते हैं।यदि राज्यव्यापी हड़ताल होती तो बस अड्डों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ सकती थी। इसके अलावा निजी बसों और अन्य वाहनों पर निर्भरता भी बढ़ने की आशंका थी।फिलहाल आंदोलन स्थगित करने के फैसले से यात्रियों की चिंता कम हुई है।
अब मांगों को लागू करने पर रहेगी नजर
सरकार और रोडवेज कर्मचारी संगठनों के बीच बनी सहमति को विवाद सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।हालांकि कर्मचारी संगठनों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैठक में जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन्हें कितनी जल्दी लागू किया जाएगा।कर्मचारियों की लंबित मांगों के संबंध में लिखित आदेश, बकाया भुगतान और सेवा संबंधी सुविधाओं पर अंतिम निर्णय आने के बाद ही विवाद का स्थायी समाधान संभव होगा।
Next Story