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अहमदाबाद। लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चंदे के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। आम जनमत पार्टी को मिले करीब 843 करोड़ रुपये के चंदे को लेकर आयकर विभाग की शिकायत पर सीआईडी क्राइम ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मिश्रा, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव, अकाउंटेंट मयूरसिंह राठौड़ और चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित कई लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि राजनीतिक चंदे की आड़ में बड़े पैमाने पर धनराशि का लेनदेन किया गया और आयकर में छूट हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।
मामले में जांच एजेंसियां राजनीतिक चंदे के स्रोत, बैंक खातों में हुए लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। आरोप है कि राजनीतिक दल के माध्यम से धनराशि को बैंकिंग व्यवस्था में जमा कराने के बाद कमीशन काटकर नकद रकम वापस लौटाई जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी खजाने को 250 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का अनुमान जताया गया है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
दो वित्तीय वर्षों में करीब 840 करोड़ रुपये का चंदा
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, आम जनमत पार्टी को वित्त वर्ष 2022-23 में करीब 620 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 220 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की बात कही गई है। दोनों वित्तीय वर्षों की रकम मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 840 करोड़ रुपये पहुंचता है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इतनी बड़ी रकम किन लोगों और संस्थाओं की ओर से दी गई थी। साथ ही चंदे के रूप में प्राप्त रकम का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया और कितनी धनराशि वास्तव में राजनीतिक कार्यों पर खर्च हुई, इसकी भी जांच की जा रही है।चंदे से संबंधित बैंक खातों, आयकर रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पार्टी अध्यक्ष सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
आयकर विभाग के एक सहायक आयुक्त की शिकायत के आधार पर अहमदाबाद में सीआईडी क्राइम ने प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव मिश्रा, कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र वैष्णव, अकाउंटेंट मयूरसिंह राठौड़, मध्यस्थ दिनेश कुमार जैन और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रणव शाह तथा आकाश सोनी सहित अन्य लोगों का नाम सामने आया है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने राजनीतिक चंदे के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को अंजाम देने में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित लेनदेन में किन अन्य व्यक्तियों, कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
चंदे की रकम वापस लौटाने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप राजनीतिक चंदे के नाम पर रकम लेकर उसे कमीशन काटने के बाद वापस लौटाने से जुड़ा है।जांच से संबंधित शिकायत के अनुसार, दानदाताओं से राजनीतिक चंदे के रूप में धनराशि प्राप्त की जाती थी। इसके बाद रकम विभिन्न कारोबारी संस्थाओं के माध्यम से आगे भेजी जाती और कथित तौर पर नकदी के रूप में निकाल ली जाती थी।इस प्रक्रिया के माध्यम से चंदा देने वाले लोग आयकर अधिनियम की धारा 80GGC के तहत कर कटौती का लाभ लेने का दावा कर सकते थे।
आरोप है कि वास्तविक राजनीतिक चंदे के बजाय इस व्यवस्था का उपयोग आयकर बचाने और धन के लेनदेन को वैध दिखाने के लिए किया गया। जांच एजेंसियां अब संबंधित बैंक खातों और दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं।
कई कंपनियों के जरिए रकम भेजने का संदेह
मामले में प्रेनित कॉरपोरेशन, हशाज कॉरपोरेशन, अयान एंटरप्राइजेज और श्री रामदेव एंटरप्राइजेज जैसी कारोबारी संस्थाओं के नाम भी सामने आए हैं।आरोप है कि इन संस्थाओं के माध्यम से चंदे की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद रकम को नकद निकालकर संबंधित लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि इन संस्थाओं के माध्यम से वास्तविक रूप से कितनी रकम का लेनदेन हुआ और किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।
चुनावी खर्च के दस्तावेजों पर भी सवाल
शिकायत में राजनीतिक गतिविधियों पर दिखाए गए खर्च को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।आरोप है कि चुनाव प्रचार, रैलियों और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों के नाम पर खर्च दर्ज किया गया, लेकिन उसके समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज और वाउचर उपलब्ध नहीं थे।जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि संबंधित खर्च वास्तव में हुआ था या केवल वित्तीय रिकॉर्ड में दिखाया गया था।
इसके अलावा वित्तीय दस्तावेजों का सत्यापन करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कथित तौर पर गलत रिकॉर्ड के आधार पर आयकर संबंधी दस्तावेज तैयार और प्रमाणित किए गए।
एडीआर की रिपोर्ट के बाद राजनीतिक चंदे पर सवाल
देश में चुनावी सुधारों और राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर लगातार राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और आय के स्रोतों का विश्लेषण करती रही है।
एडीआर की रिपोर्टों में राजनीतिक दलों की आय, दानदाताओं की जानकारी और घोषित वित्तीय स्रोतों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
संस्था ने राजनीतिक वित्तपोषण व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और दानदाताओं की जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। हालांकि, एडीआर की सामान्य रिपोर्टों को इस विशेष मामले में दर्ज प्राथमिकी के आरोपों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सरकारी खजाने को 250 करोड़ से अधिक नुकसान का अनुमान
शिकायत के अनुसार, कथित फर्जी राजनीतिक चंदे के जरिए आयकर में अनुचित छूट हासिल करने से सरकारी खजाने को 250 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
यह आंकड़ा मामले की गंभीरता को दर्शाता है। जांच एजेंसियां संबंधित आयकर रिटर्न, बैंक खातों और कथित दानदाताओं के रिकॉर्ड की पड़ताल कर वास्तविक नुकसान का आकलन करेंगी।यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह राजनीतिक चंदे और कर कटौती की व्यवस्था के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा।
जांच में सामने आ सकते हैं और नाम
सीआईडी क्राइम और आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित लेनदेन की पूरी श्रृंखला को समझना और चंदे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है।
जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल यह मामला प्राथमिकी में दर्ज आरोपों पर आधारित है और संबंधित व्यक्तियों के दोषी होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि करोड़ों रुपये के इस कथित राजनीतिक चंदा प्रकरण में जांच एजेंसियों को क्या साक्ष्य मिलते हैं और आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।
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