छत्तीसगढ़
BSP से करोड़ों के लोहा चोरी मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
2 Jun 2026 12:11 AM IST

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Durg. दुर्ग। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप चोरी मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में संलिप्त दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी क्रेन ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे और फ्लू डस्ट परिवहन करने वाले वाहनों में चोरी का लोहा लोड करने की भूमिका निभा रहे थे। इसके साथ ही इस संगठित गिरोह से जुड़े गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है, जबकि मुख्य आरोपी संजय सिंह अब भी फरार है। पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इन्द्र कुमार पटेल और मदन साहू के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे क्रेन के माध्यम से भिलाई इस्पात संयंत्र से चोरी किए गए लौह स्क्रैप को फ्लू डस्ट परिवहन वाहनों में लोड करते थे, जिससे उसे आसानी से संयंत्र परिसर से बाहर निकाला जा सके।
इससे पहले पुलिस छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज चुकी है, जिनमें चिंतानंद साहू, जितेश वर्मा, मिथेन ठाकुर, निर्मल सिंह, रविन्द्र साहू और घनश्याम गुप्ता शामिल हैं। अब नई गिरफ्तारी के बाद कुल संख्या आठ हो गई है। पुलिस के अनुसार मामले का मुख्य आरोपी संजय सिंह अभी फरार है, जिसकी तलाश में कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जांच में अब तक सामने आया है कि आरोपी संगठित तरीके से पिछले चार से पांच महीनों से फ्लू डस्ट परिवहन वाहनों की आड़ में लोहे की चोरी कर रहे थे। आरोपियों ने मैग्नेटिक क्रेन की मदद से लोहे की प्लेटें, बीम और अन्य स्क्रैप सामग्री लोड कर बाहर भेजने की योजना बनाई थी।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में चोरी का लोहा भी बरामद किया था। जांच में लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये मूल्य की लोहे की प्लेटें, बीम कटिंग और अन्य सामग्री जब्त की गई थी। इसके अलावा करीब 90 लाख रुपये मूल्य की चैन माउंटेन मशीन, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य भारी उपकरण भी बरामद किए गए थे, जिनका उपयोग चोरी के माल को लोड और ट्रांसपोर्ट करने में किया जाता था। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी रविन्द्र साहू ने स्वीकार किया कि वह मुख्य आरोपी संजय सिंह के निर्देश पर काम करता था। उसने बताया कि प्लांट के भीतर से लोहा निकालकर फ्लू डस्ट वाहनों में छुपाकर बाहर भेजा जाता था।
इस मामले में भिलाई इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक की ओर से भी एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें संयंत्र के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हैरानी की बात यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद, जिसमें 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 1200 से ज्यादा CISF जवान तैनात हैं, फिर भी लंबे समय तक चोरी की घटनाएं जारी रहीं। इस घटना ने संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुख्य आरोपी संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकता है। यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि इस चोरी का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही है। फिलहाल पुलिस की टीमें लगातार फरार आरोपी की तलाश में दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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