छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के मौजूदा और पूर्व MP-MLA पर लंबित आपराधिक मामलों का हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
Shantanu Roy
27 Aug 2026 4:20 PM IST

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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के मौजूदा और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति का अद्यतन ब्यौरा सामने रखा है। जुलाई 2026 तक की जानकारी में प्रदेश के अलग-अलग जिलों की निचली अदालतों में लंबित मामलों, उनकी सुनवाई की स्थिति और आगामी तारीखों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कई चर्चित राजनीतिक चेहरों से जुड़े आपराधिक प्रकरण भी शामिल हैं। हाईकोर्ट की ओर से सामने आए ब्यौरे में बिलासपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में विधायक अटल श्रीवास्तव से संबंधित आपराधिक प्रकरण क्रमांक 541/2026 का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190, 191(2), 192 और 126(2) के तहत आरोप दर्ज हैं। मामले में गवाही और साक्ष्य से संबंधित कार्यवाही के लिए 20 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई थी।
कई पूर्व और मौजूदा नेताओं के मामले शामिल
हाईकोर्ट के अद्यतन ब्यौरे में बलौदाबाजार के पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा और तत्कालीन विधायक किशोर नवरंगे समेत कई अन्य राजनीतिक नेताओं से संबंधित प्रकरणों की जानकारी भी शामिल बताई गई है। इन मामलों की सुनवाई प्रदेश की अलग-अलग निचली अदालतों में चल रही है। रिपोर्ट का उद्देश्य लंबित आपराधिक मामलों की न्यायिक स्थिति और उनकी प्रगति पर नजर रखना है। इसमें संबंधित अदालतों में मामलों की सुनवाई, अगली तारीख और कार्यवाही की स्थिति का विवरण दर्ज किया गया है। इस तरह हाईकोर्ट प्रदेश के जनप्रतिनिधियों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की प्रगति की निगरानी कर रहा है।
ACB और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों पर भी नजर
रिपोर्ट में रायपुर की विशेष एसीबी अदालत, धन शोधन निवारण (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े मामलों की अदालत और सीजेएम अदालतों में लंबित हाई-प्रोफाइल प्रकरणों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें अरुणपति त्रिपाठी, विधायक देवेंद्र यादव, चंद्रदेव प्रसाद राय और कवासी लखमा समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं। इन मामलों में अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई अथवा पेशी निर्धारित होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला लंबित होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के समान नहीं है। अंतिम दोषसिद्धि या निर्दोषता का फैसला संबंधित न्यायालय द्वारा मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
अलग-अलग जिलों की अदालतों की कार्यवाही की निगरानी
हाईकोर्ट के ब्यौरे में राजनांदगांव और जांजगीर-चांपा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों की अदालतों में चल रहे मामलों की जानकारी भी शामिल है। संबंधित मामलों में सुनवाई की प्रगति, अदालत में उपस्थिति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का विवरण दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई में देरी और उनकी प्रगति पर न्यायपालिका की नजर बनी हुई है। संबंधित निचली अदालतों से मामलों की स्थिति की जानकारी लेकर उन्हें अद्यतन किया जा रहा है।
पूर्व सांसद मधुसूदन यादव से जुड़े छह मामले
रिपोर्ट में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ लंबित छह अलग-अलग आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रकरणों में CGPDI एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। ब्यौरे के अनुसार, इनमें कुछ मामलों में हाईकोर्ट की रोक के कारण कार्यवाही फिलहाल प्रभावित है, जबकि अन्य मामलों में आरोपियों की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वारंट और समन जैसी कानूनी प्रक्रिया जारी है। हाईकोर्ट द्वारा लंबित मामलों का अद्यतन ब्यौरा सामने रखे जाने से प्रदेश के मौजूदा और पूर्व जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट हुई है। रिपोर्ट में दर्ज तारीखों और कार्यवाही के आधार पर संबंधित अदालतों में मामलों की आगे की सुनवाई होगी। वहीं, सभी मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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