
माना, डोमा, दतरेंगा में भी अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर
प्रशासन की सख्ती जारी
बहुत जल्द प्रशासन का अभियान गोकुल नगर, ह. बिलाल नगर, चिस्तीया नगर, बोरिया 1, बोरिया 2, काठाडिह रोड, साईं नगर, रजा सिटी के आसपास बड़े पैमाने में अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने के उपरांत अवैध प्लाट और कब्जे पर बड़ा अभियान चला कर हटाया जाएगा, क्षेत्र के पटवारी और आरआई भी नप सकते हैं। रायपुर। राजधानी के आउटर में लगातार अवैध प्ला?टिंग पर कार्रवाई की जा रही है। तहसीलों की टीम रोजाना बुलडोजर के साथ तोडफ़ोड़ कर रही है। पिछले एक हफ्ते में ही 10 एकड़ से ज्यादा जमीन पर अवैध प्ला?टिंग रोकी जा चुकी है। इतना ही नहीं जिन लोगों ने अवैध प्लाटिंग कराई है, उनके खिलाफ जांच भी की जा रही है।
कमिश्नर नगर निगम रायपुर विश्वदीप ने बताया सभी जोन कमिश्नरों को निर्देश दिया गया है कि वे अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए भूमि अधिग्रहण के तहत ऐसे प्लाट्स की सूची तैयार करें। जोन स्तर पर कार्रवाई करने के बाद प्रस्ताव मुख्यालय भेजें। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। जल्द ही ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर भी कराई जाएगी। रविवार को भी अवैध प्लाटिंग की सूचना पर रायपुर एसडीएम नंदकुमार चौबे की टीम माना, डोमा और दतरेंगा पहुंची। इन तीनों जगहों के दस्तावेजों की पहले ही जांच की गई। जांच में प्रमाणित हुआ कि तीनों जगहों पर अवैध प्लाटिंग हो रही है। टीम ने माना, डोमा और दतरेंगा में करीब सात एकड़ जमीन पर की गई अवैध प्लाटिंग की दीवारों को तोड़ दिया।
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
कलेक्टर गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। हाल ही में ग्राम सेजबहार, डूमरतराई और अटल नगर (हृक्रष्ठ्र क्षेत्र) में भी प्रशासन ने अवैध निर्माण और प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृति या अनुमति के किए गए किसी भी प्लाटिंग कार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
8 व 10 के बाद अब आउटर जोन के भूखंडों का अधिग्रहण शुरू
अवैध प्लाटिंग को टेकओवर करने के बाद उसे विकसित करने की प्रक्रिया जोन-8 और 10 के बाद निगम के अन्य जोन में भी शुरू हो गई है। आउटर के वार्ड वाले जोन में सबसे ज्यादा अवैध प्लाटिंग हो रही है। इसलिए इन्हीं वार्डों में अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए भूमाफियाओं के काटे गए प्लाट्स का अधिग्रहण किया जा रहा है। नगर निगम इन प्लाट्स को अपने अधीन करने के बाद उसका लेआउट पास कराएगा। प्लाट खरीदने वाले लोगों से विकास शुल्क लेने के बाद वहां रोड, सडक़, नाली और बिजली इत्यादि की सुविधा देगा। नगर निगम की अवैध प्लाटिंग को टेकओवर करने की योजना की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ऐसी अवैध प्लाटिंग में निर्माण 10 प्रतिशत से कम होना चाहिए। यदि 10 एकड़ की अवैध प्लाटिंग में 200 प्लाट काटे गए हैं तो वहां पर 20 से अधिक निर्माण नहीं होना चाहिए। यदि 10 प्रतिशत से अधिक निर्माण हो चुके हैं तो वहां टेकओवर करने की योजना लागू नहीं की जा सकती। फिर नगर निगम को ऐसी अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए दूसरी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। नगर निगम के पास वहां अवैध प्लाटिंग को व्यवस्थित करने का विकल्प नहीं होता। उपलब्ध जगह पर ही निगम सडक़, नाली, बिजली, पानी आदि की व्यवस्था करता है। टेकओवर की प्रक्रिया में नगर निगम को पूरा का पूरा प्लाट खाली मिलता है। यहां निर्माण या तो शुरू ही हुए होते हैं या फिर 10 प्रतिशत से कम निर्माण हुए होते हैं।
जोन-5, 6 और 9 में सबसे ज्यादा मामले
अवैध प्लाटिंग को टेकओवर करने के बाद उसे विकसित करने की नगर निगम की योजना सबसे पहले जोन-8 और दस में शुरू की गई है। जोन-10 के बोरियाखुर्द, डुंडा, अमलीडीह, देवपुरी, डूमरतराई इलाके में सबसे ज्यादा अवैध प्लाटिंग है। भूमाफियाओं का सबसे ज्यादा फोकस बोरियाखुर्द है। अकेले यहां पर ही 200 से ज्यादा अवैध प्लाटिंग है। हालांकि, टेकओवर योजना के लिए 10 प्रतिशत से कम निर्माण वाली अवैध प्लाटिंग की संख्या कम होगी, क्योंकि यहां पर तेजी से निर्माण हो रहे हैं। इसके बाद जोन-8 के हीरापुर, जरवाय, सोनडोंगरी आदि इलाकों में भी तेजी से अवैध प्लाटिंग हो रही है। यहां निर्माण की गति भी काफी तेज है।
निगम अफसरों के अलावा जोन-9 के सड्ढू, दलदल सिवनी, कचना, आमासिवनी इलाके में भी काफी अवैध प्लाटिंग हैं। जोन-5 के रायपुरा, चंगोराभाठा तथा जोन-6 के भाठागांव इलाके में काफी अवैध प्लाटिंग है। इन जोनों के टाउन प्लानिंग विभाग ने भी अवैध प्लाटिंग को टेकओवर करने के लिए नगर निगम मुख्यालय को प्रस्ताव भेजना शुरू कर दिया है। जोन-5 के प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा होगी। निगम कमिश्नर की स्वीकृति के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।





