छत्तीसगढ़

अधीक्षक जिम्मेदारी का ईमानदारी से पालन करें, वरना होगी कार्रवाई: कलेक्टर कन्नौजे

Shantanu Roy
7 Dec 2025 7:02 PM IST
अधीक्षक जिम्मेदारी का ईमानदारी से पालन करें, वरना होगी कार्रवाई: कलेक्टर कन्नौजे
x
छग
Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के आश्रम और छात्रावासों में अधीक्षकों की कार्यप्रणाली को और अधिक जिम्मेदार, संवेदनशील तथा पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में जिले के सभी आश्रम–छात्रावास अधीक्षक और अधीक्षिकाएं उपस्थित रहीं। बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं को और बेहतर बनाना था। बैठक की शुरुआत कलेक्टर डॉ. कन्नौजे ने अधीक्षकों से परिचय प्राप्त करते हुए की।

उन्होंने उनकी पदस्थापना, छात्रावास की क्षमता, बच्चों की संख्या, भोजन–नाश्ते की व्यवस्था, होमगार्ड की पोस्टिंग, स्वास्थ्य जांच, भवन मरम्मत और किसी प्रकार की कमी या मांग के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने छिंद, भटगांव और उलखर छात्रावास के बेहतर कार्यों, गुणवत्तापूर्ण भोजन और किचन गार्डन की व्यवस्था की सराहना की, जिसके बाद उपस्थित अधिकारियों द्वारा तालियों से प्रोत्साहन दिया गया। कलेक्टर ने छह महीने पहले दिए गए निर्देशों के पालन की समीक्षा भी की और स्वीकृत भवन मरम्मत एवं नए निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में सहायक आयुक्त आदिम जाति विकास बद्रीश सुखदेवे, डिप्टी कलेक्टर शिक्षा शर्मा, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक, मंडल संयोजक सहित सभी संबंधित अधीक्षक उपस्थित रहे।

कलेक्टर के प्रमुख निर्देश
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि अधीक्षक और अधीक्षिकाएं बच्चों के प्रति अभिभावक की तरह व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि “घर से दूर रहने वाले बच्चों को आश्रम–छात्रावास में ऐसा माहौल मिले, जिससे वे सुरक्षित, सम्मानित और सहज महसूस करें। छुट्टियों के बाद भी उनका वापस लौटने का मन बने, ऐसा वातावरण बनाना अधीक्षकों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने निर्देश दिया कि बच्चों से नियमित संवाद रखा जाए ताकि वे अपनी समस्याएं बेझिझक बता सकें। पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां, करियर गाइडेंस और सप्ताह में कम से कम एक दिन “बाकी दिन शिक्षक का, एक दिन अधीक्षक का” तर्ज पर गतिविधियां आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों का रिकॉर्ड व्यवस्थित हो—नाम, अभिभावक, पता, संपर्क नंबर, छुट्टी का कारण और वापसी की तिथि तक दर्ज हो। छात्रों की उपस्थिति भी समयानुसार सुनिश्चित की जाए।

सुरक्षा, भोजन और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
कलेक्टर ने निर्देश दिया कि भोजन एवं नाश्ते में विविधता होनी चाहिए, ताकि बच्चों को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें। आश्रम–छात्रावास परिसरों की सफाई, भवन के दरवाज़ों–खिड़कियों की मरम्मत, रोशनी, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। खेत के पास स्थित छात्रावासों में सांप–बिच्छू जैसे जंतु प्रवेश न करें, इसके लिए खिड़कियों पर जाली लगाने के निर्देश दिए गए। सभी बच्चों को मच्छरदानी उपलब्ध कराई जाए। पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में बालिकाओं के लिए सेनेटरी पैड की उपलब्धता अनिवार्य की गई। डॉक्टरों को निर्देशित किया गया कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करें तथा किशोरियों का हिमोग्लोबिन परीक्षण भी सुनिश्चित करें।

कलेक्टर ने कहा कि अधीक्षक स्वयं छात्रावास में रहें और अनुपस्थित पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बच्चों को खेल सामग्री वितरित करने और सामूहिक श्रमदान के माध्यम से किचन गार्डन बनाने व वहां उगाई गई सब्जियों का भोजन में उपयोग करने के निर्देश दिए। सहायक आयुक्त आदिम जाति विकास बद्रीश सुखदेवे ने कहा कि सभी अधीक्षक अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए तन–मन से कार्य करें। सभी छात्रावासों में प्राथमिक उपचार बॉक्स में आवश्यक दवाइयां और पट्टी उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए। कलेक्टर की इस विस्तृत बैठक ने आश्रम–छात्रावास व्यवस्थाओं को और अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
Next Story