छत्तीसगढ़
मेकाहारा के MBBS इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
Shantanu Roy
4 Aug 2026 10:31 PM IST

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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 4 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलन के पहले दिन इंटर्न डॉक्टरों ने शहर में बाइक रैली निकालकर राज्य सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। डॉक्टरों की मुख्य मांग वर्तमान में मिलने वाले 15,900 रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की है।
मेकाहारा परिसर से शुरू हुई बाइक रैली देवेंद्र नगर चौक, घड़ी चौक और मरीन ड्राइव से होकर पुनः चिकित्सा महाविद्यालय परिसर पहुंची। रैली के दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखा और सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संचालित किया गया।
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस इंटर्न्स को मिलने वाला स्टाइपेंड देश के कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में इंटर्न डॉक्टरों को लगभग 43 हजार रुपये प्रतिमाह, ओडिशा में करीब 42 हजार रुपये और बिहार में लगभग 27 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी 30 हजार से 45 हजार रुपये तक का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के इंटर्न डॉक्टर भी अपने कार्यभार और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में इंटर्न डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। वे नियमित रूप से 24-24 घंटे की इमरजेंसी ड्यूटी करते हैं और कई बार लगातार ड्यूटी पूरी करने के बाद भी ओपीडी में मरीजों की सेवा देते हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों और अत्यधिक कार्यभार के बावजूद वे पूरी जिम्मेदारी के साथ मरीजों का इलाज और देखभाल सुनिश्चित करते हैं।
इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि उनकी ड्यूटी केवल सामान्य वार्ड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे क्रिटिकल केयर यूनिट्स में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सीसीयू (CCU), आईसीयू (ICU), पीआईसीयू (PICU), एसआईसीयू (SICU), इमरजेंसी वार्ड सहित अन्य गंभीर रोगी देखभाल इकाइयों में लगातार सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है, जिससे आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आंदोलनरत डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशानी में डालना या स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं है। उनका मकसद केवल राज्य सरकार का ध्यान उनकी वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है ताकि लंबे समय से लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा सके। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें न केवल चिकित्सकीय जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, बल्कि कई प्रशासनिक और आपातकालीन दायित्व भी संभालने पड़ते हैं।
डॉक्टरों ने सरकार से मांग की है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी स्टाइपेंड में वृद्धि की जाए, ताकि इंटर्न डॉक्टरों को उनके कार्य के अनुरूप सम्मानजनक आर्थिक सहयोग मिल सके। उनका कहना है कि इससे भविष्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सरकार और आंदोलनरत डॉक्टरों के बीच जल्द बातचीत होती है तो इस विवाद का समाधान निकल सकता है। वहीं यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन आगे और तेज हो सकता है।
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