
फायर ब्रिगेड की पहली दो गाड़ियों ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन हालात बिगड़ते देख कुल 20 दमकल वाहन तैनात करने पड़े। दुकानों के शटर गैस कटर से काटकर दमकलकर्मियों ने भीतर तक पहुंच बनाई और घंटों की मशक्कत के बाद रात 1 बजे आग पर काबू पाया। लेकिन अफसोस, सभी दमकल वाहनों की वापसी के कुछ समय बाद आग फिर भड़क उठी और पुनः पूरी ताकत झोंकते हुए सुबह 6:30 बजे जाकर लपटों को काबू में लिया जा सका। इस भीषण हादसे के बीच थाना तेलीबांधा प्रभारी नरेंद्र मिश्रा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। अपने स्टाफ के साथ वे धुएं और लपटों के बीच घुसे और 48 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल कर उनकी जान बचाई। पुलिसकर्मियों की यह बहादुरी राजधानी में चर्चित रही।
घटनास्थल पर रायपुर कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पश्चिम दौलत राम पोर्ते, नगर पुलिस अधीक्षक कोतवाली केसरी नंदन नायक सहित आला अधिकारी पूरी रात मौजूद रहे। वहीं, फायर ब्रिगेड की टीम ने जान की परवाह किए बिना घंटों तक लपटों से जूझते हुए अंततः हालात काबू में किए। यह हादसा शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर गया है। बेबीलॉन टावर जैसी ऊँची इमारतों में अग्नि सुरक्षा के क्या इंतज़ाम हैं? शॉर्ट सर्किट जैसी मूलभूत लापरवाहियां कैसे अनदेखी की जाती रहीं? यह अब प्रशासनिक जांच का विषय है।





