छत्तीसगढ़

राव हॉस्पिटल का बड़ा फर्जीवाड़ा, संचालक पर FIR दर्ज

Shantanu Roy
15 Oct 2026 12:50 PM IST
राव हॉस्पिटल का बड़ा फर्जीवाड़ा, संचालक पर FIR दर्ज
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आरंग स्थित राव हॉस्पिटल में फायर सेफ्टी एनओसी को लेकर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन पर अग्निशमन विभाग के नियमों की अनदेखी करते हुए फायर सेफ्टी एनओसी का नवीनीकरण कराने के बजाय कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने का आरोप लगा है। नियमित सुरक्षा जांच के दौरान इस कथित जालसाजी का खुलासा हुआ। मामले में न्यू रायपुर फायर ब्रिगेड के निरीक्षक की शिकायत पर आरंग थाना पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सुरक्षा ऑडिट में खुली फर्जीवाड़े की पोल
जानकारी के मुताबिक, अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम नियमित सुरक्षा ऑडिट के तहत आरंग स्थित राव हॉस्पिटल पहुंची थी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से फायर सेफ्टी एनओसी से संबंधित दस्तावेज मांगे। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने अधिकारियों को एनओसी की फोटोकॉपी उपलब्ध कराई। दस्तावेज की जांच करते समय अधिकारियों को कुछ जानकारियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद प्रमाण पत्र पर अंकित विवरण का शासकीय पोर्टल से मिलान किया गया। जांच में एनओसी की तारीख और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों में अंतर सामने आया।

QR कोड स्कैन करते ही सामने आई सच्चाई
अधिकारियों के मुताबिक, अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत एनओसी पर जारी होने की तारीख 16 अप्रैल 2026 दर्ज थी। लेकिन जब अधिकारियों ने प्रमाण पत्र पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन किया, तो सिस्टम में वास्तविक तारीख 16 अप्रैल 2025 दिखाई दी। एक ही दस्तावेज में दो अलग-अलग तारीखें सामने आने से अधिकारियों का संदेह और गहरा गया। इसके बाद प्रमाण पत्र की विस्तृत जांच की गई। शासकीय रिकॉर्ड से मिलान करने पर दस्तावेज में अन्य गंभीर विसंगतियां भी सामने आईं।

एनओसी पर ऐसे अधिकारी का नाम, जो विभाग में है ही नहीं
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि एनओसी में जांच अधिकारी के रूप में 'पुरुषोत्तम सिंह' का नाम दर्ज था। जबकि अग्निशमन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, इस नाम का कोई अधिकारी विभाग में कार्यरत नहीं है। इसके अलावा प्रमाण पत्र पर जिस तारीख के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे, उस समय संबंधित पद पर कोई अधिकारी पदस्थ नहीं था। इन तथ्यों के आधार पर अधिकारियों ने दस्तावेज को कूटरचित पाया। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने एनओसी के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के बजाय कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराया।

अस्पताल संचालक के खिलाफ FIR दर्ज
इस मामले में न्यू रायपुर फायर ब्रिगेड के निरीक्षक पुष्पराज विनायक की शिकायत पर आरंग थाना पुलिस ने राव हॉस्पिटल के संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी एनओसी किसने तैयार की थी। जांच में इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि दस्तावेज बनाने के लिए किसी कंप्यूटर सेंटर या ग्राफिक्स डिजाइनर की मदद ली गई थी या नहीं। पुलिस के मुताबिक, जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार करने में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर जिले में फर्जी फायर NOC का पहला मामला
जिला सेनानी एवं फायर ऑफिसर पुष्पराज सिंह के मुताबिक, व्यावसायिक और चिकित्सकीय संस्थानों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी है। निर्धारित नियमों के अनुसार फायर एनओसी का समय पर नवीनीकरण कराना भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि इससे पहले बिलासपुर और अंबिकापुर में फर्जी फायर एनओसी से संबंधित मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें गिरफ्तारियां भी हुई थीं। हालांकि रायपुर जिले में इस तरह की कथित जालसाजी का यह पहला मामला बताया जा रहा है।

मरीजों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
राव हॉस्पिटल में फर्जी फायर एनओसी सामने आने के बाद अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन मौजूद रहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना वैध सुरक्षा प्रमाण पत्र के अस्पताल का संचालन मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। फिलहाल आरंग पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले लोगों की पहचान और दस्तावेज से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
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