छत्तीसगढ़
नक्सलवाद का अंधेरा छोड़ मुख्यधारा की रोशन' में कमलू राम
Shantanu Roy
20 Jun 2026 8:56 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। नक्सलवाद का खूनी दौर अब इतिहास बन रहा है। सुरक्षा बलों के सटीक अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीतियों के परिणामस्वरूप, कभी खौफ का पर्याय रहे 'रेड कॉरिडोर' (Red Corridor) के इलाके शांति और खुशहाली के 'ग्रीन कॉरिडोर' में तब्दील हो चुके हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिल जाए, तो भटके हुए जीवन को भी एक नई और खूबसूरत दिशा मिल सकती है। इसकी जीती-जागती मिसाल हैं ओरछा विकासखंड की ग्राम पंचायत कोहकामेटा के निवासी कमलू राम नूरेटी। कभी बंदूक के साए में जिंदगी बिताने वाले कमलू राम आज देश की मुख्यधारा में शामिल होकर अपने पक्के घर में सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
13 साल का संघर्ष और मुख्यधारा में लौटने का साहसिक फैसला
कमलू राम के जीवन का शुरुआती दौर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। युवावस्था के भटकाव में वे नक्सली संगठन से जुड़ गए और लगभग 13 वर्षों तक हिंसा के साए में रहे। लेकिन वर्ष 2013 में उन्होंने इस खोखली विचारधारा को छोड़ आत्मसमर्पण करने का एक बड़ा और साहसिक निर्णय लिया। समाज की मुख्यधारा में लौटकर उन्होंने शांति और विकास के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
किराए के मकान से 'अपने घर' तक का सफर
आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार को एक सुरक्षित भविष्य देने की थी। सीमित आय के कारण वे लंबे समय तक किराए के मकान में रहे। आर्थिक तंगी ऐसी थी कि खुद का पक्का घर बनाना एक अधूरे सपने जैसा था। वे हमेशा बच्चों के बेहतर भविष्य और सामाजिक सम्मान के लिए एक अदद छत की कमी महसूस करते थे।
सरकार की योजनाओं ने बदली तकदीर
वर्ष 2024-25 में शासन की एक विशेष पहल ने कमलू राम की जिंदगी का रुख बदल दिया। आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित परिवारों के सर्वेक्षण के दौरान उनका चयन 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के लिए किया गया। शासन द्वारा उन्हें वित्तीय और ढांचागत सहायता प्रदान की गई।पात्रता के अनुसार पक्के मकान के लिए 1 लाख 20 हजार की स्वीकृति और मनरेगा (MGNREGA) के तहत मजदूरी के रूप में 23 हज़ार 490 का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसी तरह 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत घर में शौचालय का निर्माण तथा 'सौभाग्य योजना' के माध्यम से घर में मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया गया। कमलू राम नूरेटी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने मेरे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। जिस घर का सपना मैं सालों से देख रहा था, वह आज सरकार की मदद से सच हो गया है। अब मेरे पास न सिर्फ एक सुरक्षित छत है, बल्कि समाज में सिर उठाकर जीने का सम्मान भी है।
बदलाव का एक आदर्श मॉडल
आज कमलू राम का घर बिजली, पानी और शौचालय जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं से लैस एक आदर्श आवास बन चुका है। पक्की छत और मजबूत दीवारों ने उनके परिवार को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा तो दी ही है, साथ ही उनके जीवन में एक नया स्थायित्व भी लाया है। कमलू राम नूरेटी की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। यह कहानी संदेश देती है कि हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में आने वाले हर हाथ को संवारने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 'प्रधानमंत्री आवास' आज कमलू राम के लिए केवल ईंट-पत्थर का मकान नहीं, बल्कि एक नए जीवन, नई उम्मीद और सुरक्षित भविष्य का मजबूत प्रतीक बन चुका है।
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