छत्तीसगढ़

काछनदेवी ने दी दशहरा मनाने की अनुमति

Nilmani Pal
22 Sept 2025 12:47 PM IST
काछनदेवी ने दी दशहरा मनाने की अनुमति
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बस्तर। बस्तर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण काछनगादी की रस्म 21 सितंबर की शाम निभाई गई है। 10 साल की बालिका पीहू दास पर काछनदेवी सवार हुईं। फिर बस्तर राजपरिवार के सदस्यों को बेल के कांटों से बने झूले पर झूलकर दशहरा मनाने की अनुमति दीं। करीब 617 साल से चली आ रही परंपरा को निभाया गया।

दरअसल, जगदलपुर के भंगाराम चौक में स्थित काछनगुड़ी में रस्म को निभाया गया है। रविवार शाम बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव समेत अन्य सदस्य काछनगुड़ी पहुंचे थे। यहां पीहू पर काछन​​​​​देवी सवार हुईं। फिर परंपरा अनुसार बेल के कांटों से बने झूले पर सवार होकर उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप कमलचंद भंजदेव को फूल देकर पर्व मनाने अनुमति दीं।

कमलचंद भंजदेव ने कहा कि, काछन और रैला माता दोनों राजघराने की बेटियां थीं, जिन्होंने आत्म हत्या कर ली थी। उनकी पवित्र आत्मा यहीं पर विराजती हैं। काछन माता और रैला माता एक छोटी कन्या पर आती हैं।सालों से यह परंपरा चली आ रही है कि पितृ पक्ष के आखिरी दिन राज परिवार के सदस्य खुद आशीर्वाद लेने आते हैं। माता फूल के रूप में आशीर्वाद दीं हैं। जिससे बस्तर दशहरा निर्विघ्न संपन्न हो।

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