छत्तीसगढ़

UAPA समीक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष बने गौतम चौरडिया

Shantanu Roy
29 Sept 2026 6:35 PM IST
UAPA समीक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष बने गौतम चौरडिया
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग ने विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 यानी UAPA के तहत गठित समीक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और वर्तमान में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष गौतम चौरडिया को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार गौतम चौरडिया समीक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन मामलों की स्वतंत्र समीक्षा करेंगे, जिनमें UAPA के तहत जांच के दौरान साक्ष्य जुटाए गए हैं। प्राधिकरण का मुख्य काम जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का स्वतंत्र परीक्षण करना होगा।
इसके बाद समीक्षा प्राधिकरण संबंधित मामले में अभियोजन की स्वीकृति दी जानी चाहिए या नहीं, इस पर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसा देगा। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि UAPA जैसे गंभीर मामलों में अभियोजन की मंजूरी देने से पहले स्वतंत्र स्तर पर साक्ष्यों की समीक्षा आवश्यक होती है। गृह विभाग ने यह नियुक्ति विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 की धारा 45 की उप-धारा (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की है। इस प्रावधान के तहत सक्षम प्राधिकारी जांच में एकत्र सामग्री का परीक्षण कर अभियोजन स्वीकृति से संबंधित राय प्रस्तुत करता है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग ने 9 अप्रैल 2026 को समीक्षा प्राधिकरण के गठन से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। उस समय प्राधिकरण की संरचना और कार्यप्रणाली निर्धारित की गई थी। अब अध्यक्ष की नियुक्ति होने के बाद प्राधिकरण के कार्य को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। गौतम चौरडिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं। वर्तमान में वे राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। न्यायिक अनुभव को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें UAPA मामलों की समीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
समीक्षा प्राधिकरण का दायरा केवल औपचारिक अनुमोदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसे जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच करनी होगी। इससे यह देखा जाएगा कि संबंधित मामले में अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं। प्राधिकरण पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की ओर से प्रस्तुत सामग्री का परीक्षण करेगा। इसके बाद अपनी स्वतंत्र राय तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा। इसी अनुशंसा के आधार पर अभियोजन स्वीकृति से जुड़ी आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
UAPA से जुड़े मामलों में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रावधानों के पालन के साथ-साथ साक्ष्यों की निष्पक्ष समीक्षा भी जरूरी होती है। इसी उद्देश्य से समीक्षा प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। गृह विभाग के आदेश के बाद अब UAPA से जुड़े मामलों में अभियोजन स्वीकृति से पहले साक्ष्यों की समीक्षा गौतम चौरडिया की अध्यक्षता वाले प्राधिकरण द्वारा की जाएगी। राज्य सरकार को मिलने वाली अनुशंसा के आधार पर संबंधित मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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