छत्तीसगढ़

32 लाख की ट्रांसपोर्ट धोखाधड़ी में फरार आरोपी गिरफ्तार

Shantanu Roy
26 Sept 2026 4:24 PM IST
32 लाख की ट्रांसपोर्ट धोखाधड़ी में फरार आरोपी गिरफ्तार
x
छग
Raigarh. रायगढ़। ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत कोतवाली पुलिस ने ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में फरार आरोपी प्रकाश मिश्रा को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद न्यायालय की अनुमति लेकर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया। मामले में सह आरोपी दीपक शर्मा को पुलिस जुलाई में ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार, 24 मार्च 2026 को श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक के संचालक कमल किशोर शाह ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे।
भुगतान प्रक्रिया के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आने के बाद कंपनी स्तर पर जांच कराई गई। जांच में सितंबर 2025 से कथित फर्जीवाड़ा किए जाने की बात सामने आई। आरोप है कि एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर बनाकर कंपनी से भुगतान कराया गया। पुलिस के मुताबिक, इसके लिए संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया और कंपनी से करीब 32 लाख रुपये निकाले गए। शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 187/2026 में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए बिल-वाउचर में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से सत्यापन कराया गया। पुलिस के अनुसार, इनमें कई नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के निकले, जिनका श्रीराम ट्रांसपोर्ट या माल परिवहन से कोई संबंध नहीं था। संबंधित वाहन मालिकों से पूछताछ में भी उन्होंने कंपनी के लिए परिवहन कार्य करने से इनकार किया। इस मामले में पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को सह आरोपी दीपक शर्मा को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दीपक ने प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और अलग-अलग वाहनों के नंबरों का इस्तेमाल कर भुगतान कराने की जानकारी दी थी।
पुलिस के अनुसार, जिन खातों में रकम भेजी जाती थी, उनमें से कमीशन काटने के बाद शेष राशि बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड और डिजिटल भुगतान माध्यमों से वापस भेजी जाती थी। पूछताछ में दीपक ने करीब 15 लाख रुपये स्वयं रखने और लगभग 16 से 17 लाख रुपये प्रकाश मिश्रा को दिए जाने की जानकारी पुलिस को दी थी। प्रकाश मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच उसने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। आरोपी की पहचान प्रकाश मिश्रा पिता विद्यासागर मिश्रा, उम्र 27 वर्ष, निवासी सोनुमुड़ा देवारपारा, थाना जूटमिल रायगढ़ के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में प्रकाश मिश्रा ने फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और सह आरोपी के साथ मिलकर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को डिजिटल माध्यमों से प्राप्त करने संबंधी जानकारी दी है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब फर्जीवाड़े में इस्तेमाल बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच कर रही है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक धोखाधड़ी और संगठित वित्तीय अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।
Next Story