छत्तीसगढ़

कृषि विभाग के गोदाम से 400 स्प्रेयर टैंक चोरी, 8-10 लाख रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति लापता

Shantanu Roy
14 Sept 2025 10:12 PM IST
कृषि विभाग के गोदाम से 400 स्प्रेयर टैंक चोरी, 8-10 लाख रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति लापता
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Lailunga. लैलूंगा। कृषि विभाग के गोदाम से 400 स्प्रेयर टैंक चोरी होने की खबर ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। अनुमानित कीमत 8 से 10 लाख रुपये बताई जा रही है। गोदाम में काम करने वाले कर्मचारियों को चोरी की जानकारी किसी ने नहीं दी थी। इस बात का पता तब चला जब किसी बाहरी व्यक्ति ने विभाग को सूचना दी।
घटना का विवरण
जब कर्मचारी गोदाम पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि गोदाम का ताला टूटा हुआ है और भारी संख्या में स्प्रेयर टैंक गायब थे। कुछ टैंक बाहर फेंके हुए मिले, जिससे साफ हुआ कि यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि योजनाबद्ध घटना हो सकती है। यह घटना विभाग की लापरवाही और सुरक्षा में कमी पर सवाल खड़े करती है।
जानकारी के अनुसार, ये स्प्रेयर टैंक लगभग चार साल पहले “DMF फंड” से किसानों को बांटे जाने थे। लेकिन कलेक्टर ने वितरण पर रोक लगा दी थी और टैंकों को गोदाम में रखा गया। चार साल तक सुरक्षित रखा गया सामान अचानक गायब हो गया। इससे सवाल उठते हैं कि क्या यह विभागीय लापरवाही का परिणाम है या किसी सोची-समझी साज़िश का हिस्सा।
पुलिस और विभाग की सुस्ती पर सवाल
कर्मचारी और ग्रामीण दोनों ही विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। चोरी की सूचना मिलने के बाद भी पुलिस ने पत्रकारों के हस्तक्षेप के बाद ही सप्ताह भर बाद जांच के लिए कदम उठाए। अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। विभाग द्वारा भी मामले में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस गोदाम में लाखों रुपये मूल्य की सरकारी सामग्री रखी थी, वहाँ न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम थे और न ही जिम्मेदारी तय थी। अब चोरी के बाद विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचता नज़र आ रहा है।
मुख्य सवाल
400 टैंक चोरी होते रहे और किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी?
चार साल से बंद पड़े टैंक आखिर किसके इशारे पर रखे गए थे?
पुलिस की सुस्ती कहीं ऊपर से दबाव का नतीजा तो नहीं?
विभागीय पूछताछ में गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई?
ग्रामीणों और किसानों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें सख्त सजा दी जाए। किसानों का कहना है कि सरकारी सामग्री की सुरक्षा और वितरण में लापरवाही से उनका भरोसा सिस्टम पर खत्म हो रहा है।

विभाग की ओर से प्रतिक्रिया
अभी तक कृषि विभाग की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अधिकारी केवल यही कह रहे हैं कि मामले की जांच जारी है। हालांकि, कर्मचारियों और ग्रामीणों का कहना है कि विभाग में इस मामले को गंभीरता से लेने की बजाय सुस्ती दिखाई जा रही है।
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