रायपुर में न्यूड पार्टी के आयोजक सहित 7 आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल

जनता से रिश्ता ने खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की
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Raipur. रायपुर। पुलिस ने एक बड़े अवैध आयोजन का भंडाफोड़ करते हुए स्ट्रेन्जर हाउस/पूल पार्टी का आयोजन करने वाले आयोजक सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक कार्रवाई शुरू कर दी है। यह घटना एस.एस. फार्म हाउस भाठागांव में आयोजित किए जाने वाले अवैध कार्यक्रम से जुड़ी है, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा था। पुलिस की एण्टी क्राइम एवं साइबर यूनिट तथा थाना तेलीबांधा की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़कर उनके खिलाफ अश्लीलता एवं साइबर अपराध से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
छत्तीसगढ़ में अपराध और राजनीतिक संरक्षण के बीच गहराते रिश्तों ने पुलिस की तहक़ीक़ात गहरी करने की जरूरत है और किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आना चाहिए। कई बार सामने आता है कि छोटे स्तर के आरोपियों को पकड़ कर कार्रवाई की जाती है, लेकिन असली मास्टरमाइंड जो एक बड़े राजनीतिक दल का कार्यकर्ता और नेता होने के साथ-साथ पूरे प्रदेश में पहचान बना चुका है। अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। ये वही लोग हैं जो छुटभैये नेताओं की बाढ़ खड़ी कर अपराध की दुनिया में अपने हित साधते हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के नाड़ा-पायजामा छाप नेताओं का एक गुट सक्रिय है, जो फार्महाउस और क्लबों में ठेकेदारी लेकर अवैध कारोबार संचालित कर रहा है। इस गिरोह की विशेषता यह है कि ये स्वयं को सफेदपोश नेताओं के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि पर्दे के पीछे वे जिस्म फरोशी, शराब तस्करी, अवैध जुआ और अन्य आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं। यह गिरोह ठेके लेकर अपने नेटवर्क को मजबूत करता है और कानून से बचने के लिए राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करता है। पुलिस की रेड का डर नहीं रहता, क्योंकि इनके संपर्क सत्ता तक फैले हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि ठेका मिलने के साथ ही इन नेताओं के गुर्गे फार्महाउस और क्लबों में अपना कब्जा कर लेते हैं और स्थानीय युवाओं को अपराध की राह पर धकेलते हैं। समाज में फैली असुरक्षा और डर का माहौल इनकी ताकत बन चुका है। इसी तरह का एक और मामला बीती रात को सामने आया है। जिसमें चंगोरा भाता का नामी सट्टेबाज ने बड़े छुटभैया नेता के क्लब में जमकर मारपीट की जानकारी आ रही है।
जो भी इनके खिलाफ आवाज उठाता है, उस पर दबाव डालकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। कई बार जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए छोटे अपराधियों को पकड़ कर मामला हल्का कर दिया जाता है, जबकि असली अपराधी खुलेआम घूमते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेताओं के खिलाफ जांच जरूरी है, क्योंकि ये सिर्फ अपराध नहीं बढ़ा रहे, बल्कि समाज की नैतिकता और कानून व्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। फार्महाउस और क्लब अपराध के केंद्र बन चुके हैं, जहाँ नशे, अवैध कारोबार और शोषण जैसी घटनाएँ आम होती जा रही हैं। पुलिस की जिम्मेदारी है कि निष्पक्ष और साहसिक कार्रवाई करते हुए असली दोषियों तक पहुँचे। बिना किसी राजनीतिक दबाव के, तकनीकी जांच, वित्तीय लेन-देन की समीक्षा और गुप्त सूत्रों की मदद से इस गिरोह का पर्दाफाश किया जाए। समाज के जागरूक नागरिकों ने भी पुलिस से अपील की है कि वे नाड़ा-पायजामा छाप नेताओं की असलियत सामने लाकर कानून का डर कायम करें। अन्यथा फार्महाउस और क्लब अपराध के अड्डे बनते रहेंगे और युवा पीढ़ी गलत दिशा में बढ़ती जाएगी। अब देखना यह है कि पुलिस असली मुजरिम तक पहुँचकर कानून की ताकत का एहसास कराती है या फिर राजनीतिक दबाव में मामूली मामलों में ही कार्रवाई कर संतुष्ट हो जाती है। जनता की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।





