बिहार

तेजी से बढ़ा है डॉक्टर शापिंग का चलन

Admin Delhi 1
25 Feb 2023 1:08 PM GMT
तेजी से बढ़ा है डॉक्टर शापिंग का चलन
x

भागलपुर न्यूज़: सिर, बदन, पीठ और पेट में दर्द. इन लक्षणों के आधार पर इंटरनेट पर बीमारी ढूंढ़ने की प्रवृत्ति बीते तीन सालों में तेजी से बढ़ी है. इंटरनेट पर सर्च कर अपनी बीमारी जानने के बाद उसके अनुसार दवा लेने की प्रवृत्ति लोगों के मन में न केवल खौफ पैदा कर रही है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान करते हुए बीमार भी कर रही है.

इस आदत की वजह से लोगों के मस्तिष्क में केमिकल इम्बैलेंस यानी असंतुलन की स्थिति भी आ रही है. मायागंज अस्पताल के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार भगत ने बताया कि छोटी-छोटी चीजों को सर्च करने के साथ-साथ लोग बीमारियों को भी इंटरनेट पर सर्च करने लगे हैं. नतीजा, सिरदर्द और मुंह के छाले जैसी बीमारी को वे इंटरनेट पर ब्रेन ट्यूमर व मुख का कैंसर के रूप में पाते हैं. भयानक बीमारी होने का डर लोगों के दिल-ओ-दिमाग में बैठ जाता है और वे खुद को मौत के मुहाने पर समझकर क्लीनिकों एवं जांच घरों की अनावश्यक दौड़ लगाने लगते हैं. लोगों में आए इस मानसिक बदलाव यानी डिसॉर्डर को मनोविज्ञान की भाषा में डॉक्टर शॉपिंग कहते हैं.

सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. पंकज कुमार मनस्वी कहते हैं कि दिमाग में केमिकल इम्बैलेंस होने के कारण सामान्य शारीरिक समस्याएं भी बड़ी-बड़ी बीमारी लगने लगती है. जैसे-जैसे इंटरनेट का क्रेज बढ़ा है, वैसे-वैसे डॉक्टर शॉपिंग का चलन तेजी से आया है. कोरोना काल के बाद से यह तेजी से फैला है.

ये है डॉक्टर शॉपिंग

छोटी-छोटी बीमारियों को लक्षण के आधार पर इंटरनेट या फिर इंटरनेट पर सर्च करने की आदत को डॉक्टर शॉपिंग कहा जाता है. लक्षण के आधार पर वह गूगल बड़ी व गंभीर बीमारी होने की बात बताता है, जो कि सर्च करने वाले के दिलोदिमाग में खौफ पैदा कर देता है. इस तरह के केस रोजाना डॉक्टरों की निजी क्लीनिक में मिल रहे हैं.

बढ़ी धड़कन को समझ लिया हार्ट अटैक

आदमपुर के रवि प्रकाश को 14 फरवरी की शाम को अचानक दिल की धड़कन बढ़ी हुई महसूस हुआ. इंटरनेट पर सर्च किया तो उन्हें पाया कि ये लक्षण तो हार्ट अटैक का सूचक है. इसके बाद वे परेशान हो गये. हटिया रोड स्थित एक वरीय फिजिशियन के क्लीनिक में गये. जहां उनसे ट्रूप आई, इको कॉर्डियोग्राफी, ईसीजी व पैथोलॉजी व एमआरआई आदि कराने की सलाह दी गयी. इसमें उनके 13 हजार रुपये खर्च हो गये और जांच रिपोर्ट में वे पूरी तरह से स्वस्थ मिले.

बार-बार मोशन को कोलन कैंसर समझ बैठा

सराय निवासी 33 साल के विजय कुमार को 4 फरवरी को बार-बार मोशन के लिए जाना पड़ा. परेशान होकर उसने इंटरनेट पर सर्च किया तो उसे मिली जानकारी के अनुसार, उसे कोलन कैंसर होने का भ्रम हो गया. इसके बाद पहले वह गैस्ट्रो फिजिशियन के पास पहुंचा. एक, दो नहीं बल्कि उसने अलग-अलग अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर 10 बार अल्ट्रासाउंड जांच करायी. पांच बार एंडोस्कोपी और एक बार सीटी स्कैन जांच करायी. बार-बार रिपोर्ट में उसे कुछ नहीं हुआ है. वह मिला तो उसे भरोसा नहीं हो रहा था. अंत में एक मनोचिकित्सक के पास गया तो उसकी काउंसिलिंग हुई.

Next Story