बिहार

बिहार में रोजगार को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 7:56 PM IST
बिहार में रोजगार को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
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पटना। बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों के विकास को नई गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) के तहत प्रदेश में तीन लाख विकास कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत करीब 22 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और लोगों की आजीविका को मजबूत बनाना है।
गुरुवार, 5 नवंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में वीबी-जी राम जी मिशन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से योजना की वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित कार्यों और रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मिशन के तहत विकास कार्यों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को इसका लाभ मिल सके। इसके लिए योजनाओं के चयन, क्रियान्वयन और निगरानी की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि वीबी-जी राम जी मिशन के तहत अब तक करीब डेढ़ लाख योजनाएं ली गई हैं। मुख्यमंत्री ने इनकी संख्या बढ़ाकर तीन लाख करने का निर्देश दिया। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संबंधित विभागों को योजनाबद्ध तरीके से काम करने को कहा गया है। सरकार की मंशा है कि विकास कार्यों के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलें।मिशन के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय को मजबूत बनाना और आजीविका के साधनों का विस्तार करना है। रोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त वित्तीय भागीदारी है। इसके तहत खर्च का अनुपात 60:40 निर्धारित किया गया है। यानी निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के अनुसार केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत हिस्सेदारी वहन करेगी। इससे ग्रामीण विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने और योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में सहायता मिलने की अपेक्षा है।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं को मिशन के अंतर्गत शामिल करने का निर्देश दिया है। इन योजनाओं का संबंध ग्रामीण रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत संरचना के विकास से होगा।
सरकार
का लक्ष्य विकास कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
वीबी-जी राम जी मिशन में जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका संवर्धन और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है। इस प्रकार की परियोजनाओं से जहां ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलता है, वहीं गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी किया जा सकता है।जल संरक्षण से जुड़े कार्यों के माध्यम से तालाबों, जलस्रोतों और वर्षा जल संचयन की व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने की संभावनाएं हैं। बिहार के कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और आजीविका का बड़ा हिस्सा जल संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं कृषि गतिविधियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
ग्रामीण विकास योजनाओं का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना भी है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण अनेक ग्रामीण परिवारों के सदस्यों को काम की तलाश में दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। यदि गांवों में नियमित रूप से रोजगार उपलब्ध होता है, तो ऐसे परिवारों को अपने क्षेत्र में ही आजीविका के अवसर मिल सकते हैं।योजना के तहत महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की भी संभावनाएं हैं। ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्थानीय स्तर पर काम उपलब्ध होने से महिलाओं को घर के आसपास रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ रोजगार की उपलब्धता और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देने का संदेश दिया है। ग्रामीण विकास कार्यों का लाभ तभी स्थायी रूप से मिल सकेगा, जब परियोजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा और उनका क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप होगा।तीन लाख कार्यों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। योजनाओं की पहचान, प्रस्ताव तैयार करने, आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने और कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया में संबंधित विभागों को सक्रिय रहना होगा। साथ ही रोजगार उपलब्ध कराने से जुड़े रिकॉर्ड और भुगतान व्यवस्था की नियमित निगरानी भी आवश्यक होगी।
सरकार के इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है। यदि योजनाएं निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लागू होती हैं, तो गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ स्थानीय विकास को भी गति मिल सकती है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और बुनियादी ढांचे का विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब गांवों में निर्माण और विकास कार्य शुरू होते हैं, तो स्थानीय स्तर पर मजदूरी के अवसर बढ़ते हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार होने की संभावना रहती है। वहीं, उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण भविष्य की आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा दे सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि बिहार सरकार वीबी-जी राम जी मिशन को ग्रामीण रोजगार और विकास के प्रमुख माध्यम के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है। डेढ़ लाख योजनाओं की मौजूदा संख्या को बढ़ाकर तीन लाख करने तथा 22 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं को मिशन से जोड़ने का निर्देश इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित लक्ष्य को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पूरा करने की होगी। ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का वास्तविक लाभ दिलाने के लिए योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन जरूरी होगा। यदि सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहती है, तो ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों के समग्र विकास की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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