महाराष्ट्र

गोकुल डेयरी विवाद पर फडणवीस का पलटवार, राहुल गांधी को दिया करारा जवाब

Ratna Netam
5 Nov 2026 7:52 PM IST
गोकुल डेयरी विवाद पर फडणवीस का पलटवार, राहुल गांधी को दिया करारा जवाब
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मुंबई : 5 नवंबर 2026। महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित प्रसिद्ध गोकुल दुग्ध संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गोकुल दुग्ध संघ में अध्यक्ष के चुनाव के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक दो बार रद्द करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का हस्तक्षेप संस्था के संचालन में उत्पन्न गतिरोध को दूर करने के उद्देश्य से किया गया है। वहीं, कांग्रेस ने सरकार पर चुनावी जनादेश को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।दरअसल, कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ, जिसे गोकुल डेयरी के नाम से जाना जाता है, के निदेशक मंडल के चुनाव के बाद अध्यक्ष पद को लेकर विवाद शुरू हो गया। इस चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल ने बहुमत हासिल किया, लेकिन अध्यक्ष का चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं हो सका। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा सहकारी संस्थाओं के निदेशक मंडल में सरकारी प्रतिनिधियों की नियुक्ति से संबंधित नियमों में बदलाव किए जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोकुल दुग्ध संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव कराने के लिए निर्धारित संख्या में निदेशकों की उपस्थिति आवश्यक थी। हालांकि, दो बार बैठक बुलाए जाने के बावजूद आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। इसी वजह से चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
फडणवीस के अनुसार, लगातार बैठकें नहीं हो पाने से संस्था के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ने की स्थिति बन रही थी। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रहती, तो पूरी चुनाव प्रक्रिया दोबारा कराने की नौबत आ सकती थी। सरकार ने इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए हस्तक्षेप किया।मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि लगभग 4,500 मतदाताओं वाली एक सहकारी संस्था के स्थानीय चुनावी विवाद को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को मामले की पूरी जानकारी लेकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए। फडणवीस ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए इसे प्रशासनिक आवश्यकता बताया।दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि गोकुल दुग्ध संघ के चुनाव में दूध उत्पादकों ने अपना जनादेश दिया था, लेकिन भाजपा उस जनादेश को बदलने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद नियमों में परिवर्तन करके संस्था के निदेशक मंडल का समीकरण प्रभावित किया जा रहा है।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की आलोचना करते हुए इस कदम को दूध उत्पादकों के वोटों के साथ अन्याय बताया। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से बहुमत हासिल नहीं होने के बाद सरकारी हस्तक्षेप का रास्ता अपनाया जा रहा है। हालांकि, राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
गोकुल दुग्ध संघ के निदेशक मंडल में कुल 25 निर्वाचित सदस्य हैं। चुनाव परिणामों के अनुसार, कांग्रेस नेता सतेज पाटील समर्थित पैनल को 13 सीटें मिलीं, जबकि प्रतिद्वंद्वी पैनल ने 12 सीटें हासिल कीं। इस प्रकार कांग्रेस समर्थित समूह को एक सीट का बहुमत मिला।लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए कम से कम 14 निदेशकों की उपस्थिति आवश्यक है। विपक्षी खेमे के निदेशकों के बैठक में उपस्थित नहीं होने के कारण निर्धारित कोरम पूरा नहीं हो सका। इसी तकनीकी स्थिति के चलते चुनाव प्रक्रिया में गतिरोध उत्पन्न हुआ।विवाद उस समय और बढ़ गया, जब महाराष्ट्र सरकार ने बड़े सहकारी संघों के निदेशक मंडल में सरकार द्वारा नामित सदस्यों की नियुक्ति की अनुमति देने वाले संशोधन को मंजूरी दी। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में 500 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में पांच सरकारी नामित सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।गोकुल दुग्ध संघ में चार सरकारी निदेशकों की नियुक्ति को लेकर विशेष विवाद खड़ा हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे निर्वाचित निदेशक मंडल में शक्ति संतुलन बदल सकता है और अध्यक्ष पद के चुनाव का परिणाम प्रभावित हो सकता है। वहीं, मुख्यमंत्री फडणवीस का कहना है कि हस्तक्षेप का उद्देश्य संस्था में जारी गतिरोध समाप्त करना है।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री हसन मुश्रीफ ने भी सरकार के निर्णय का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गोकुल दुग्ध संघ में नेतृत्व का संकट समाप्त करना आवश्यक था। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य संस्था का लोकतांत्रिक संचालन सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।मुश्रीफ ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने पूरे मामले को सही संदर्भ में नहीं समझा। उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव में उत्पन्न गतिरोध के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने को जिम्मेदार बताया।इस बीच कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने राज्य सरकार के कदम का विरोध करते हुए इसे कोल्हापुर के दूध उत्पादकों के जनादेश का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव में उनके पैनल को स्पष्ट बहुमत मिला था और उसी आधार पर अध्यक्ष का चुनाव होना चाहिए।पाटील ने सरकारी हस्तक्षेप के विरोध में 9 नवंबर को कोल्हापुर में विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचित निदेशकों की भूमिका कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।गोकुल दुग्ध संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव अब 10 नवंबर को प्रस्तावित है। इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारियां की जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक महत्व हासिल कर सकता है।गौरतलब है कि गोकुल दुग्ध संघ महाराष्ट्र के प्रमुख सहकारी दुग्ध संगठनों में शामिल है। इसका संबंध बड़ी संख्या में दूध उत्पादक किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। इसलिए संघ के प्रबंधन और नेतृत्व को लेकर होने वाले फैसलों का महत्व केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के आर्थिक हितों से भी जुड़ा हुआ हैफिलहाल गोकुल डेयरी चुनाव विवाद में सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस इसे कोरम पूरा नहीं होने से उत्पन्न प्रशासनिक समस्या बता रहे हैं, जबकि राहुल गांधी और कांग्रेस नेता इसे लोकतांत्रिक जनादेश में हस्तक्षेप का मामला मान रहे हैं। अब सभी की नजरें 10 नवंबर को प्रस्तावित अध्यक्ष पद के चुनाव और इस विवाद पर होने वाले अगले घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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