बिहार

Bihar Crime : शादी की 57वीं सालगिरह पर पत्नी की बेरहमी से हत्या, कोर्ट ने सुनाई फांसी

Sarita
26 Feb 2026 11:30 AM IST
Bihar Crime :  शादी की 57वीं सालगिरह पर पत्नी  की बेरहमी से हत्या, कोर्ट ने सुनाई फांसी
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Bihar Crime : बिहार के अरवल जिले की एक अदालत ने एक सनसनीखेज हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। यह अरवल जिले के न्यायिक इतिहास में किसी मामले में सुनाई गई मौत की पहली सजा है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश रवि रंजन मिश्रा की अदालत ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभतम से दुर्लभ) श्रेणी में रखते हुए दोषी बीरबल साहू को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत फांसी की सजा सुनाई है।
महेंदिया थाना क्षेत्र के जमुहारी गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक बीरबल साहू ने जिस बेरहमी से इस वारदात को अंजाम दिया, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि आरोपी अपनी पत्नी सुमंती सिन्हा की हत्या काफी पहले से करना चाहता था, लेकिन उसे डर था कि सरकारी नौकरी के दौरान पकड़े जाने पर उसकी पेंशन और सामाजिक प्रतिष्ठा छिन जाएगी। उसने अपनी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का इंतजार किया और हत्या के लिए अपनी शादी की 57वीं सालगिरह 22 जुलाई, 2024 का दिन चुना।
सरकारी वकील बिंदु भूषण प्रसाद ने बताया कि बीरबल साहू को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था। इसी शक के चलते उसने धारदार हथियार से अपनी पत्नी की नृशंस हत्या कर दी। इतना ही नहीं, शव की पहचान मिटाने के लिए हैवान बने पति ने पत्नी के शरीर को 12 टुकड़ों में काट दिया। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर इस कृत्य को अत्यंत क्रूर और अमानवीय माना गया।
इस खौफनाक मामले में सबसे भावुक और निर्णायक मोड़ तब आया जब आरोपी का अपना बेटा, राज कुमार सिंह, पिता के खिलाफ खड़ा हो गया। बेटे ने ही महेंदिया थाने में अपने पिता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान अदालत में नौ गवाह पेश किए गए, जिनमें बेटे की गवाही ने अभियोजन पक्ष के मामले को बेहद मजबूत कर दिया, जिससे कोर्ट के लिए सजा तय करना आसान हो गया। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी का अपराध जघन्य है और यह समाज में एक कड़ा संदेश भेजने के लिए 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में आता है। बीएनएस की धारा 103(1) में हत्या के लिए उम्रकैद या मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन अपराध की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए कोर्ट ने दोषी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया।
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