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डिब्रूगढ़। असम के डिब्रूगढ़ जिले के टेंगाखात में शुक्रवार सुबह ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के परिसर में बड़ा हादसा हो गया। कंपनी के इंटरमीडिएट टैंक फार्म (आईटीएफ) में रखरखाव कार्य के दौरान अचानक विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि छह अन्य कर्मचारी झुलसकर घायल हो गए। शुरुआती जानकारी में एक कर्मचारी के लापता होने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि की। घटना के बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और दमकल कर्मियों को आग बुझाने के लिए तत्काल मौके पर भेजा गया।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार सुबह करीब 9 बजकर 5 मिनट पर हुआ। उस समय परिसर में नियमित रखरखाव का काम चल रहा था। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, कच्चे तेल के भंडारण से जुड़े हिस्से में कर्मचारी एक वाल्व पर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक विस्फोट हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक बताई जा रही है कि घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारी उसकी चपेट में आ गए।
हादसे के तुरंत बाद परिसर में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने सुरक्षित स्थानों की ओर जाने का प्रयास किया। घटना की सूचना मिलते ही कंपनी की अग्निशमन टीम को सक्रिय किया गया। आग की गंभीरता को देखते हुए बचाव कार्य को प्राथमिकता दी गई। ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार, दमकल कर्मियों के प्रयास से आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि, विस्फोट और आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है।हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारी की पहचान राजू दत्ता के रूप में हुई है। वह टेंगाखात के बोरडोलोंगोनी गांव का निवासी बताया गया है। राजू दत्ता मुंबई की निजी कंपनी स्पेक्ट्रॉन इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए काम करता था। यह कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड के परिसर में संबंधित कार्यों से जुड़ी हुई है। मृतक के साथ घायल हुए छह कर्मचारी भी इसी निजी कंपनी से जुड़े बताए गए हैं।
घटना के बाद शुरुआती घंटों में राजू दत्ता के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से यह आशंका भी जताई जा रही थी कि विस्फोट की तीव्रता के कारण वह दूर जा गिरा होगा। हालांकि, उस समय किसी अधिकारी ने उसकी मृत्यु की पुष्टि नहीं की थी। बाद में कंपनी की ओर से जारी जानकारी में एक कर्मचारी की मौत की पुष्टि होने से स्थिति स्पष्ट हुई।घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। पांच कर्मचारियों को डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएमसीएच) में भर्ती कराया गया, जबकि एक अन्य घायल को ऑयल इंडिया अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में घायलों का उपचार किया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों में कुछ कर्मचारियों के गंभीर रूप से झुलसने की जानकारी सामने आई है।घायल कर्मचारियों की पहचान तापस गोगोई (40), शैलेन गोगोई (45), कुमुद गोगोई (38), गोलाप दत्ता (58) और इंद्र गोगोई (40) के रूप में हुई है। तापस गोगोई डिब्रूगढ़ के मिलन नगर का निवासी है, जबकि अन्य चार कर्मचारी टेंगाखात क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। छठे घायल कर्मचारी की विस्तृत पहचान की जानकारी शुरुआती रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं हो सकी थी।
स्पेक्ट्रॉन इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के एरिया मैनेजर कमल फुकन ने घटना के बाद बताया कि हादसा तकनीकी कार्य के दौरान हुआ। उन्होंने शुरुआती जानकारी देते हुए कहा कि लगभग पांच घायल कर्मचारियों को असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचाया गया है। इसके अतिरिक्त एक कर्मचारी का इलाज ऑयल इंडिया अस्पताल में चल रहा था, जबकि उस समय एक अन्य कर्मचारी का पता नहीं चल सका था।फुकन के मुताबिक, घटना के समय मशीनरी से संबंधित नियमित रखरखाव का काम किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि इस तरह के उपकरणों की समय-समय पर सर्विसिंग की जाती है। हालांकि, उन्होंने विस्फोट के सटीक कारण के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।
ऑयल इंडिया लिमिटेड ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मृतक कर्मचारी के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। कंपनी के बयान के अनुसार, आग लगने के तुरंत बाद अग्निशमन कर्मियों को मौके पर भेजा गया और स्थिति को नियंत्रण में लाने के प्रयास शुरू किए गए। आग पर काबू पाने की पुष्टि भी कंपनी ने की है।इस दुर्घटना ने औद्योगिक परिसरों में कर्मचारियों की सुरक्षा और रखरखाव के दौरान अपनाए जाने वाले एहतियाती उपायों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से कच्चे तेल के भंडारण और उससे संबंधित उपकरणों पर काम करते समय सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल भंडारण वाले क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी के कारण छोटी तकनीकी खराबी भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है। हालांकि, टेंगाखात में हुए इस विस्फोट को किसी विशेष तकनीकी खराबी से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।हादसे के बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि रखरखाव कार्य शुरू करने से पहले आवश्यक सुरक्षा परीक्षण किए गए थे या नहीं। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों को उपलब्ध कराए गए सुरक्षा उपकरणों, तकनीकी निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता सामने आई है।
घटना में जान गंवाने वाले कर्मचारी के परिवार के सामने अचानक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वहीं, घायल कर्मचारियों के परिजनों की चिंता भी बढ़ गई है। फिलहाल प्राथमिकता घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और दुर्घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की है।ऑयल इंडिया लिमिटेड ने कहा है कि घटना से संबंधित अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध होने पर आगे साझा की जाएगी। आग पर काबू पा लिए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियमित रखरखाव के दौरान इतना बड़ा हादसा आखिर कैसे हुआ। विस्तृत जांच से ही दुर्घटना की वास्तविक वजह और संभावित सुरक्षा संबंधी कमियों का पता चल सकेगा।
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