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Yoga Tips: यूरिक एसिड को कम करने और किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए योग

Sarita
4 July 2025 7:19 AM IST
Yoga Tips:  यूरिक एसिड को कम करने और किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए योग
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Yoga Tips: शरीर प्राकृतिक तरीके से यूरिक एसिड बनाता है, जब भोजन में पाए जाने वाले प्यूरीन को तोड़ने से बनता है। कुछ स्तर तक यूरिक एसिड की मात्रा ठीक है, लेकिन इसका स्तर बढ़ जाए तो यह जोड़ो में दर्द, सूजन और गाउट जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। यूरिक एसिड रक्त में घुलकर किडनी के माध्यम से पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। शरीर में यूरिक एसिड के स्तर बढ़ने को हाइपरयूरिसीमिया कहते हैं।
यूरिक एसिड बढ़ने के स्वास्थ्य नुकसान:
यूरिक एसिड बढ़ने के कारण गाउट की समस्या हो सकती है, जिससे जोड़ों में सूजन, लालिमा और तेज दर्द महसूस होता है।
गुर्दे की पथरी की संभावना बढ़ जाती है, जिससे तेज दर्द, पेशाब में खून और पेशाब करने में समस्या हो सकती है।
यूरिक एसिड लंबे समय तक बढ़ा रहने से किडनी की कार्यक्षमता कम हो सकती है।
यूरिक एसिड हृदय रोगों का जोखिम भी बढ़ा सकता है। यह उच्च रक्तचाप और अन्य हृदय रोगों के जोखिम का कारक बन सकता है।
यूरिक एसिड का उच्च स्तर इंसुलिन के कामकाज को प्रभावित करता है और मधुमेह का कारण बन सकता है।
यूरिक एसिड के स्तर को प्राकृतिक तरीके से कम करने के साथ ही किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए योग फायदेमंद हो सकता है। कुछ योग आसन अतिरिक्त यूरिक एसिड को बाहर निकालने, किडनी में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। यहां 5 शक्तिशाली योगासनों के बारे में बताया जा रहा है, जो स्वाभाविक रूप से किडनी को स्वस्थ रखने और यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं।
क्या आपको कभी पेट फूला हुआ या सुस्ती महसूस होती है? पवनमुक्तासन फंसी हुई गैसों को बाहर निकालने में मदद करता है, पाचन में सुधार करता है और डिटाॅक्सिफिकेशन को बढ़ावा देता है। ये सभी यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित करने में योगदान देते हैं।
पवनमुक्तासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को जोड़ें। फिर हाथ को शरीर के दोनों तरफ रखते हुए सांस छोड़े और घुटनों को पेट की तरफ मोड़ें। घुटनों को छाती तक ले जाकर सिर को घुटनों तक ले जाएं। अपने हाथों से पैरों को पकड़कर जितना हो सके, अपने पास लेकर आएं। इस मुद्रा में कुछ देर रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं।
भुजंगासन:
ये आसन किडने के स्वास्थ्य के लिए गेम चेंजर की तरह है। यह पेट के अंगों को उत्तेजित करता है और किडनी में बेहतर रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देता है, जिससे किडनी को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।
भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर अपनी हथेलियों को कंधों के नीचे रखें। सांस लें और अपनी छाती को ऊपर उठाएं। कोहनी को थोड़ा मोड़कर रखें। गहरी सांस लेते हुए 15-20 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें।
धनुरासन :
धनुरासन गुर्दे की मालिश करने, उनके कार्य को उत्तेजित करने और डिटाॅक्स को बढ़ावा देने के लिए एकदम सही है। साथ ही, यह रीढ़ को मजबूत करता है और पीठ दर्द से राहत देता है।
इस आसन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटें और अपने घुटनों को मोड़ें। पीछे की ओर से अपने टखनों को पकड़ें। सांस लें और छाती और जांघों को जमीन से ऊपर उठाएं। गहरी सांस लेते हुए 15-20 सेकंड तक रुकें।
ब्रिज पोज किडनी के कार्य को बेहतर बनाने और तनाव को कम करने के लिए बहुत बढ़िया है। किडनी और स्ट्रेस, ये दोनों ही यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए अपने घुटनों को मोड़कर और पैरों को कूल्हे की चौड़ाई से अलग करके अपनी पीठ के बल लेट जाएं। अब पैरों को जमीन पर दबाएं और अपने कूल्हों को छत की ओर उठाएं। 20-30 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें।
उत्तानासन:
यह सरल आसन गुर्दे में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है, विषाक्त पदार्थों को हटाने में सहायता करता है और यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रण में रखता है।
इसके अभ्यास के लिए सीधे खड़े होकर धीरे-धीरे अपने कूल्हों से आगे की ओर झुकें। अपने हाथों से फर्श को छूएं। सिर को आराम देते हुए गहरी सांस लें। इस मुद्रा को 20-30 सेकंड तक बनाए रखें।
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