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Yoga Tips: थायराइड नियंत्रण के लिए योगासन आपके लिए वरदान हैं

Sarita
16 Nov 2025 7:25 AM IST
Yoga Tips:   थायराइड नियंत्रण के लिए योगासन आपके लिए वरदान हैं
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Yoga Tips: थायराइड एक ग्रंथि है जो गर्दन में स्थित होती है और यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। आजकल थायराइड की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक देखने को मिल रही है। वजन बढ़ना, थकान, तनाव, गले में सूजन और हार्मोनल असंतुलन इसके आम लक्षण हैं। लेकिन खुशखबरी ये है कि कुछ योगासन नियमित रूप से करने से थायराइड को कंट्रोल में रखा जा सकता है। योग एक प्राकृतिक उपाय है, जो न केवल थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करते हैं, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करते हैं, जिससे हार्मोन बैलेंस बना रहता है। यहां प्रभावशाली पांच आसान और असरदार योगासन बताए जा रहे हैं जो थायराइड मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माने जाते हैं।
सर्वांगासन :
सर्वांगासन थायरॉयड ग्रंथि को सक्रिय करता है और हार्मोन संतुलन में मदद करता है। यह आसन मेटाबॉलिज्म सुधारता है। हाई ब्लड प्रेशर या गर्दन की समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह से अभ्यास करें। पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों से कमर को सपोर्ट दें। पूरा शरीर कंधों पर टिकाएं।
मत्स्यासन :
मत्स्यासन का अभ्यास गले की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और थायराइड ग्रंथि को उत्तेजना देता है। इस आसन से सिर तक ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचता है। मत्स्यासन के अभ्यास के लिए पद्मासन में बैठकर धीरे धीरे पीछे झुकें और पीठ के बल लेट जाएं। अपने दाएं हाथ से बाएं पैर और बाएं हाथ से दाएं पैर को पकड़ें। कोहनियों को जमीन पर टिकाएं और घुटनों को जमीन से सटाएं। सांस लेते समय सिर को पीछे की ओर उठाएं। इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें। फिर शुरूआती अवस्था में आ जाएं।
भुजंगासन :
इस आसन का अभ्यास गले और छाती को खोलता है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेट जाएं और हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएं और सिर ऊपर रखें। 20-30 सेकंड तक रुकें। इस आसन का अभ्यास रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है। गर्दन और पीठ के तनाव को कम करता है। साथ ही कंधों को रिलैक्स करता है।
उष्ट्रासन:
ये आसन गले को पीछे की ओर स्ट्रेच करता है, थायराइड को एक्टिव करता है। इस योगासन को करने के लिए घुटनों के बल बैठ जाएं। दोनों घुटनों के बीच कम से कम 6 इंच की दूरी रखें। अब दोनों हाथों को पीछे एड़ी की ओर ले जाएं। फिर दाएं हाथ के टखने को बाएं हाथ के टखने से छुएं। अपनी टांगों को सीधा रखते हुए पेट आगे की ओर निकालें। इस अवस्था में कुछ देर रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं।
भ्रामरी प्राणायाम तनाव कम करता है जिससे हार्मोन असंतुलन में सुधार होता है। इसके अभ्यास के लिए आंखें बंद करके गहरी सांस लें, दोनों कानों को अंगूठों से बंद करें और मधुमक्खी जैसी ध्वनि निकालें।
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