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देश में आधी आबादी में कमी, शाकाहारियों के लिए बढ़ा ये Vitamin का खतरा
Harrison
6 Dec 2025 7:35 PM IST

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Lifestyle , लाइफस्टाइल : देश में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देश की लगभग आधी आबादी में एक जरूरी विटामिन की कमी पाई जा रही है, जिसका असर सीधे शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विटामिन खासकर शाकाहारियों के लिए अधिक चिंता का विषय बन गया है।
हालिया अध्ययन और सर्वेक्षणों के अनुसार, विटामिन B12, जिसे "कोबालामिन" भी कहा जाता है, लगभग 45-50% भारतीयों में पर्याप्त मात्रा में नहीं पाया जा रहा है। यह विटामिन न केवल लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, बल्कि तंत्रिका तंत्र, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा उत्पादन के लिए भी बेहद जरूरी है। इसकी कमी से थकान, कमजोरी, चक्कर आना, याददाश्त की कमी और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि शाकाहारी और पूरी तरह शाकाहारी (वेज़न या वीगन) लोगों में विटामिन B12 की कमी सबसे अधिक देखी गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह विटामिन अधिकतर पशु उत्पादों जैसे मांस, अंडा, दूध और दही में पाया जाता है। शाकाहारी लोग इन स्रोतों का सेवन नहीं करते, जिससे उन्हें सप्लीमेंट या फोर्टिफाइड फूड्स से इसे पूरा करना पड़ता है।
डॉ. अंशुला रॉय, न्यूट्रिशनिस्ट और हेल्थ कंसल्टेंट, कहती हैं, "शाकाहारियों को विटामिन B12 की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसकी कमी धीरे-धीरे होती है और शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान या कमजोरी समझ लिए जाते हैं। समय पर जांच और सप्लीमेंट के इस्तेमाल से इस समस्या से बचा जा सकता है।"
भारत में खानपान की बदलती आदतों और बढ़ते शाकाहारी रुझान के कारण यह स्थिति और गंभीर होती जा रही है। लोगों में जागरूकता की कमी और विटामिन B12 युक्त फूड्स के सेवन की आदत ना होने से स्थिति और बिगड़ रही है। विशेषज्ञों ने लोगों को सुझाव दिया है कि वे नियमित ब्लड टेस्ट कराएं और यदि कमी पाई जाए तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट लें।
इसके अलावा, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ जैसे कि ब्रीड, अनाज और प्लांट-आधारित मिल्क में यह विटामिन जोड़ना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्राकृतिक स्रोत से ही विटामिन सबसे प्रभावी रूप से अवशोषित होता है। इसलिए जहां संभव हो, डेयरी उत्पाद या अंडे जैसे विकल्प शामिल करना फायदेमंद है।
सामाजिक और आर्थिक कारणों से भी कुछ समूहों में यह कमी ज्यादा पाई जाती है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में इस विटामिन की कमी गंभीर परिणाम दे सकती है। बच्चों में इसकी कमी से मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है, जबकि बुजुर्गों में तंत्रिका तंत्र और याददाश्त की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन B12 की कमी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती लक्षणों में थकान, चक्कर, मिचली और याददाश्त कमजोर होना शामिल हैं। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स और एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग अपने खानपान पर ध्यान दें, जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे इस विटामिन की कमी को पहचानें और अपने शरीर की जरूरतों को पूरा करें।
देश की लगभग आधी आबादी में विटामिन B12 की कमी का यह आंकड़ा चेतावनी देता है कि लोगों को अपनी सेहत और खानपान पर और अधिक जागरूक होने की जरूरत है। यह न केवल शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए जरूरी है, बल्कि लंबे समय में स्वस्थ जीवन जीने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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