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कम बजट में हेल्दी स्नैकिंग के ये 5 विकल्प

Ratna Netam
19 Sept 2026 8:47 PM IST
कम बजट में हेल्दी स्नैकिंग के ये 5 विकल्प
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नई दिल्ली। शाम की चाय के साथ बिस्किट, नमकीन या चिप्स खाने की आदत लगभग हर घर में देखने को मिलती है। भूख लगने पर ये चीजें आसानी से मिल जाती हैं और ज्यादा महंगी भी नहीं होतीं। लेकिन नियमित रूप से ज्यादा नमक, चीनी या अत्यधिक प्रोसेस्ड स्नैक्स खाने को लेकर पोषण विशेषज्ञ लंबे समय से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर ‘FoodPharmer’ के नाम से मशहूर रेवंत हिमतसिंका ने 50 रुपये से कम कीमत में मिलने वाले पांच ऐसे स्नैक्स बताए हैं, जिन्हें बिस्किट-नमकीन के मुकाबले बेहतर विकल्प के तौर पर चुना जा सकता है।
FoodPharmer अक्सर पैकेज्ड फूड के लेबल, उनमें मौजूद चीनी, नमक और दूसरी सामग्री को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हैं। इस बार उन्होंने सस्ते स्नैक विकल्पों की बात करते हुए बताया कि हेल्दी खाने के लिए हर बार महंगे प्रोटीन बार, विदेशी ड्राई फ्रूट या महंगे पैकेज्ड फूड खरीदना जरूरी नहीं है। रोजमर्रा में आसानी से उपलब्ध कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ भी स्नैक के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
हालांकि यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी खाने को केवल उसकी कीमत या ‘हेल्दी’ लेबल के आधार पर अच्छा नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, एलर्जी, कुल डाइट और कितनी मात्रा में वह खाद्य पदार्थ खा रहा है, ये सभी बातें महत्वपूर्ण हैं।
1. भुना चना
सस्ते और आसानी से उपलब्ध स्नैक्स की बात हो तो भुना चना सबसे परिचित विकल्पों में से एक है। किराना दुकान से लेकर सुपरमार्केट तक यह आसानी से मिल जाता है। इसकी छोटी मात्रा 50 रुपये से काफी कम में खरीदी जा सकती है।
चना पौधों से मिलने वाले प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। फाइबर की मौजूदगी के कारण इसे खाने के बाद पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। यही वजह है कि शाम को बार-बार कुछ खाने की इच्छा होने पर सीमित मात्रा में भुना चना एक उपयोगी विकल्प बन सकता है।
बाजार में मिलने वाले भुने चने को खरीदते समय अतिरिक्त नमक और मसालों पर ध्यान देना चाहिए। सादा या कम नमक वाला विकल्प बेहतर हो सकता है। जरूरत से ज्यादा नमकीन चना खाने पर सोडियम का सेवन बढ़ सकता है।
2. मूंगफली
मूंगफली को भी कम बजट वाला स्नैक माना जाता है। भारत के ज्यादातर हिस्सों में यह आसानी से उपलब्ध है और छोटी मात्रा 50 रुपये से कम में मिल सकती है।
मूंगफली में प्रोटीन के साथ वसा भी होती है। इसमें मौजूद वसा का बड़ा हिस्सा असंतृप्त वसा का होता है। इसके अलावा इसमें फाइबर और कई सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
लेकिन मूंगफली कैलोरी के लिहाज से ऊर्जा-सघन खाद्य पदार्थ है। इसका मतलब यह है कि थोड़ी मात्रा में भी काफी कैलोरी मिल सकती है। इसलिए इसे ‘हेल्दी’ मानकर बहुत ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं होगा।
सादा भुना हुआ या बिना अतिरिक्त नमक वाली मूंगफली बेहतर विकल्प हो सकती है। बहुत ज्यादा नमक, तेल या मसाले में तैयार पैकेज्ड मूंगफली को उसी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
जिन लोगों को मूंगफली से एलर्जी है, उन्हें इससे पूरी तरह बचना चाहिए।
3. मखाना
पिछले कुछ वर्षों में मखाना स्नैक के तौर पर काफी लोकप्रिय हुआ है। बाजार में इसके कई महंगे फ्लेवर्ड पैकेट भी मिलते हैं, लेकिन सामान्य सादा मखाना छोटी मात्रा में लिया जाए तो बजट में इस्तेमाल किया जा सकता है।
मखाने को हल्का भूनकर खाया जा सकता है। घर में इसे तैयार करते समय ज्यादा घी, तेल और नमक डालने से बचा जाए तो यह चिप्स और ज्यादा नमक वाले नमकीन के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो सकता है।
इसकी खासियत यह है कि इसे बिना डीप फ्राई किए भी कुरकुरा बनाया जा सकता है। शाम की चाय के साथ कुरकुरा स्नैक खाने की इच्छा रखने वालों के लिए यह उपयोगी विकल्प हो सकता है।
हालांकि मखाना प्रोटीन का असाधारण स्रोत नहीं है और केवल इसे खाने से संतुलित पोषण की जरूरत पूरी नहीं होती। इसे पूरी डाइट के एक छोटे हिस्से के रूप में देखना चाहिए।
4. पॉपकॉर्न
सिनेमा हॉल में मिलने वाला मक्खन, चीज और बहुत ज्यादा नमक वाला पॉपकॉर्न अलग बात है, लेकिन घर पर तैयार किया गया सादा पॉपकॉर्न एक सरल स्नैक विकल्प हो सकता है।
पॉपकॉर्न मक्का से बनता है और साबुत अनाज की श्रेणी में आता है। इसे कम तेल और सीमित नमक के साथ तैयार करने पर यह कई तले हुए स्नैक्स की तुलना में हल्का विकल्प हो सकता है।
पॉपकॉर्न की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम मात्रा के सूखे मकई के दानों से काफी मात्रा में पॉपकॉर्न तैयार हो जाता है। इस कारण कम बजट में घर के कई सदस्यों के लिए स्नैक तैयार किया जा सकता है।
लेकिन बाजार में मिलने वाले कैरामेल, बटर या चीज वाले पॉपकॉर्न में चीनी, वसा और सोडियम की मात्रा काफी बढ़ सकती है। इसलिए ‘पॉपकॉर्न हेल्दी है’ वाली बात उसकी तैयारी के तरीके पर निर्भर करती है।
घर में एयर-पॉप या बहुत कम तेल में तैयार पॉपकॉर्न ज्यादा व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
5. केला या मौसमी फल
पैकेट वाले स्नैक की जगह फल सबसे सरल विकल्पों में शामिल हो सकते हैं। केला खास तौर पर कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होने के कारण उपयोगी है। अधिकांश स्थानों पर 50 रुपये में एक से ज्यादा केले खरीदे जा सकते हैं, हालांकि कीमत शहर और मौसम के अनुसार बदलती रहती है।
केले में प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट के साथ पोटैशियम और फाइबर मिलता है। भूख लगने पर एक केला पैकेज्ड बिस्किट या मीठे स्नैक के स्थान पर चुना जा सकता है।
सिर्फ केला ही नहीं, मौसम के हिसाब से अमरूद, पपीता, संतरा या दूसरे स्थानीय फल भी बजट के अनुसार विकल्प हो सकते हैं।
फल का फायदा यह है कि इसमें केवल कैलोरी नहीं बल्कि अलग-अलग विटामिन, खनिज और फाइबर भी मिलता है। साबुत फल सामान्यतः जूस की तुलना में बेहतर विकल्प होता है, क्योंकि उसमें फाइबर बना रहता है।
बिस्किट में क्या है समस्या?
हर बिस्किट को खराब कहना सही नहीं होगा। बाजार में अलग-अलग प्रकार के बिस्किट उपलब्ध हैं और उनकी सामग्री भी अलग होती है। लेकिन कई लोकप्रिय मीठे बिस्किट में रिफाइंड आटा, अतिरिक्त चीनी और वसा की मात्रा उल्लेखनीय हो सकती है।
सबसे बड़ी समस्या मात्रा की होती है। चाय के साथ दो बिस्किट से शुरुआत होती है और कई बार व्यक्ति अनजाने में आधा पैकेट खा लेता है। इससे अतिरिक्त कैलोरी और चीनी का सेवन बढ़ सकता है।
इसी तरह ‘डाइजेस्टिव’, ‘फिटनेस’ या ‘मल्टीग्रेन’ जैसे शब्द देखकर किसी पैकेट को अपने आप हेल्दी नहीं मान लेना चाहिए। उसका न्यूट्रिशन लेबल और सामग्री सूची देखना जरूरी है।
नमकीन और चिप्स में सोडियम पर रखें नजर
पैकेज्ड नमकीन और चिप्स में समस्या केवल तेल की नहीं होती। इनमें नमक यानी सोडियम की मात्रा भी ज्यादा हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम यानी करीब 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। पूरे दिन में घर के भोजन, अचार, पापड़, नमकीन और दूसरे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से मिलने वाला नमक इसमें शामिल होता है।
इसलिए स्नैक खरीदते समय केवल कैलोरी नहीं बल्कि प्रति 100 ग्राम सोडियम, अतिरिक्त चीनी और संतृप्त वसा जैसी जानकारी भी देखनी चाहिए।
₹50 का मतलब कीमत हर जगह समान नहीं
FoodPharmer की ओर से बताए गए कम बजट वाले विकल्पों में एक बात समझना जरूरी है कि खाद्य पदार्थों की कीमत पूरे देश में एक जैसी नहीं होती। शहर, दुकान, ब्रांड, पैकेट के आकार और मौसम के अनुसार कीमत बदल सकती है।
उदाहरण के लिए स्थानीय बाजार में मिलने वाला भुना चना या मूंगफली किसी ब्रांडेड पैकेट की तुलना में काफी सस्ता हो सकता है। वहीं फ्लेवर्ड मखाना महंगा पड़ सकता है।
इसलिए ‘50 रुपये से कम’ को एक सामान्य बजट उदाहरण के रूप में देखना बेहतर है, न कि हर जगह लागू निश्चित कीमत के रूप में।
घर में स्नैक तैयार करना भी विकल्प
बाजार से हर बार पैकेट खरीदने के बजाय घर में भी कम खर्च में स्नैक तैयार किया जा सकता है। भुना चना और मूंगफली मिलाकर छोटी मात्रा में खाई जा सकती है। पॉपकॉर्न घर में बनाया जा सकता है। फल काटकर उसमें बिना अतिरिक्त चीनी के खाया जा सकता है।
इससे व्यक्ति तेल, नमक और मसालों की मात्रा खुद नियंत्रित कर सकता है।
‘हेल्दी’ का मतलब अनलिमिटेड नहीं
किसी खाद्य पदार्थ को पौष्टिक विकल्प मानने का मतलब यह नहीं कि उसे कितनी भी मात्रा में खाया जा सकता है। मूंगफली जैसे खाद्य पदार्थ पौष्टिक होने के साथ कैलोरी में भी अधिक होते हैं। वहीं ज्यादा नमक डालकर खाया गया चना या पॉपकॉर्न भी बेहतर विकल्प होने का फायदा कम कर सकता है।
संतुलित डाइट में स्नैक का काम दो मुख्य भोजन के बीच भूख को संभालना है, न कि एक अतिरिक्त भारी भोजन बन जाना।
कुल मिलाकर कम बजट में बेहतर स्नैक चुनना संभव है। भुना चना, मूंगफली, सीमित मात्रा में मखाना, घर में तैयार सादा पॉपकॉर्न और मौसमी फल ऐसे विकल्प हैं जिन्हें जरूरत और उपलब्धता के अनुसार डाइट में शामिल किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात पैकेट पर लिखे ‘हेल्दी’, ‘फिट’ या ‘डाइट’ जैसे दावों के बजाय सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी देखना है। रोजमर्रा के खाने में छोटे बदलाव लंबे समय में बेहतर खानपान की आदत बनाने में मदद कर सकते हैं।
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