लाइफ स्टाइल

साउथ की फेवरेट इडली का विदेशी कनेक्शन

Rajeshwari Nishad
14 Oct 2026 5:31 PM IST
साउथ की फेवरेट इडली का विदेशी कनेक्शन
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लाइफ स्टाइल : जब भी दक्षिण भारतीय खाने की बात होती है, तो इडली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। सफेद, मुलायम और भाप में पकाई जाने वाली इडली न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता भी मानी जाती है। सांभर और नारियल की चटनी के साथ इसका स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है। देश के लगभग हर बड़े शहर में इडली आसानी से मिल जाती है और आज यह भारतीय खानपान का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इडली की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों के बीच मतभेद हैं? कुछ ऐतिहासिक संदर्भों और खाद्य इतिहास से जुड़ी धारणाओं के आधार पर यह सवाल उठता रहा है कि क्या इडली का वर्तमान स्वरूप भारत में ही विकसित हुआ था या इसके पीछे किसी दूसरे क्षेत्र की पाक
परंपरा
का भी योगदान रहा है।
इडली की उत्पत्ति को लेकर क्या कहता है इतिहास?
इडली की उत्पत्ति के बारे में कोई एक सर्वमान्य ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस व्यंजन का उल्लेख प्राचीन भारतीय साहित्य में मिलता है। खाद्य इतिहासकार के. टी. आचार्य के अनुसार, इडली से मिलते-जुलते व्यंजन का उल्लेख लगभग 10वीं शताब्दी के कन्नड़ साहित्य में मिलता है। इससे पता चलता है कि दक्षिण भारत में इडली जैसी खाद्य परंपरा काफी पुरानी है।
कुछ इतिहासकारों ने यह संभावना भी जताई है कि इडली बनाने की तकनीक पर दक्षिण-पूर्व एशिया की भाप में पकाए जाने वाले खाद्य पदार्थों का प्रभाव पड़ा हो सकता है। इस विचार के अनुसार, प्राचीन काल में समुद्री व्यापार और लोगों के आवागमन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की पाक परंपराओं का आदान-प्रदान हुआ होगा। हालांकि, यह एक ऐतिहासिक परिकल्पना है, न कि ऐसा सिद्ध तथ्य जिसके आधार पर इडली को निश्चित रूप से विदेशी व्यंजन कहा जा सके।
इसलिए यह कहना कि इडली पूरी तरह भारत की नहीं है, ऐतिहासिक रूप से सही निष्कर्ष नहीं होगा। इसकी उत्पत्ति और विकास की कहानी कई संभावनाओं से जुड़ी हुई है।
पुराने समय में कैसी होती थी इडली?
आज हम जिस इडली को चावल और उड़द दाल के मिश्रण को फर्मेंट करके बनाते हैं, उसका स्वरूप समय के साथ विकसित हुआ है। पुराने साहित्य में इडली से संबंधित विवरणों और आधुनिक इडली की विधि में कुछ अंतर होने की बात कही जाती है।
खाद्य इतिहासकारों के अनुसार, शुरुआती दौर में इडली बनाने की प्रक्रिया आज जैसी ही थी, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। समय के साथ चावल और उड़द दाल के अनुपात, घोल को फर्मेंट करने की तकनीक तथा भाप में पकाने के तरीकों में बदलाव आया होगा। आज प्रचलित इडली का मुलायम और स्पंजी स्वरूप इन प्रक्रियाओं का परिणाम है।
फर्मेंटेशन यानी किण्वन की प्रक्रिया में सूक्ष्मजीव घोल में मौजूद पदार्थों पर काम करते हैं, जिससे उसका स्वाद, बनावट और कुछ पोषण संबंधी गुण प्रभावित होते हैं। इसी प्रक्रिया के कारण इडली का घोल फूलता है और पकने के बाद इडली हल्की तथा स्पंजी बनती है।
दक्षिण भारत में कैसे बनी इडली की पहचान?
इडली का दक्षिण भारत के खानपान से गहरा संबंध है। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में इसके अलग-अलग रूप और परोसने के तरीके देखने को मिलते हैं। समय के साथ यह व्यंजन घरेलू रसोई से निकलकर छोटे भोजनालयों, होटलों और रेस्तरां तक पहुंच गया।
इडली की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसे बनाने का अपेक्षाकृत सरल तरीका है। इसके लिए तैयार किए गए घोल को सांचों में डालकर भाप में पकाया जाता है। इसमें तलने के लिए तेल की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए यह कई अन्य नाश्तों की तुलना में हल्का विकल्प हो सकती है।
इसके अलावा, इडली को सांभर, नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी और कई अन्य व्यंजनों के साथ परोसा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसके स्वाद और साथ परोसे जाने वाले व्यंजनों में विविधता देखने को मिलती है।
इडली सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत से भी जुड़ी है
इडली को अक्सर हल्के नाश्ते के रूप में पसंद किया जाता है। चावल और उड़द दाल से बनने के कारण इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन दोनों मिलते हैं। फर्मेंटेशन इसकी बनावट को बेहतर बनाने में मदद करता है और कुछ पोषक तत्वों की उपलब्धता पर भी प्रभाव डाल सकता है।
हालांकि, इडली कितनी पौष्टिक होगी, यह उसकी सामग्री, मात्रा और उसके साथ खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों पर निर्भर करता है। सांभर के साथ खाने पर भोजन में दाल और सब्जियों से मिलने वाले पोषक तत्व भी शामिल हो जाते हैं। वहीं, नारियल की चटनी स्वाद के साथ वसा भी प्रदान करती है।
आज दुनिया भर में पसंद की जाती है इडली
आज इडली केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने में भी खाया जाता है। समय के साथ इसकी कई नई किस्में भी लोकप्रिय हुई हैं, जिनमें रवा इडली, मिनी इडली और अलग-अलग अनाजों से बनाई जाने वाली इडली शामिल हैं।
इडली की कहानी यह बताती है कि खानपान की परंपराएं समय के साथ विकसित होती रहती हैं। किसी व्यंजन का आज का स्वरूप कई पीढ़ियों के अनुभव, स्थानीय सामग्री और पकाने की तकनीकों से बनता है।
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