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- दिशा सालियान केस में...

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मुंबई। दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से मामले की नए सिरे से जांच शुरू किए जाने के करीब एक महीने बाद दिशा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नीलेश ओझा ने कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने कहा है कि मामले में नए डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे मौत की परिस्थितियों और कथित साजिश से जुड़े सवालों की जांच की जा सकती है। वकील ने दिशा सालियान की मौत को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और आर्यन खान ड्रग मामले से जोड़ने की आशंका भी जताई है। हालांकि, इन तीनों मामलों के बीच किसी साजिश या सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के कुछ दिनों बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने मुंबई स्थित आवास पर मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच कम समय के अंतर के कारण कई तरह के सवाल उठाए गए थे। हालांकि, केवल घटनाओं का समय नजदीक होना उनके आपस में जुड़े होने का प्रमाण नहीं है।
दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और सितंबर 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने नए सिरे से जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने दिशा के पिता का बयान दर्ज करने के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
दिशा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि जांच में कुछ नए और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें वीडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरें, गवाहों से संबंधित जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं। इन सामग्रियों को लेकर परिवार का कहना है कि इनकी विस्तृत जांच से घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों का जवाब मिल सकता है।
24 सितंबर 2026 को दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपने वकीलों के साथ मुंबई स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंचकर एक पेन ड्राइव सौंपी थी। परिवार के वकीलों के अनुसार, इसमें एक कथित प्रत्यक्षदर्शी का बयान और मामले से जुड़े वीडियो शामिल हैं। हालांकि, इन सामग्रियों में किए गए दावों की सत्यता जांच एजेंसी के आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही स्थापित हो सकेगी।
वकील ओझा ने अब 1 जून से 8 जून 2020 के बीच के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच को भी महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने शिवानी शर्मा नाम की एक व्यक्ति की कथित सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड का उल्लेख किया है। वकील का कहना है कि उस समय की डिजिटल गतिविधियां और संबंधित लोगों के संपर्कों की जांच से मामले में नई जानकारी सामने आ सकती है। हालांकि, इन विशिष्ट रिकॉर्ड की सामग्री और जांच में उनकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ओझा ने दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामलों के बीच संभावित संबंध होने का दावा भी किया है। इसके अलावा उन्होंने आर्यन खान ड्रग मामले से संबंधित संभावित कड़ियों का उल्लेख किया है। यह वकील का दावा है, न कि सीबीआई द्वारा स्थापित कोई निष्कर्ष। फिलहाल किसी सार्वजनिक आधिकारिक जांच रिपोर्ट में इन तीनों मामलों के बीच किसी साझा साजिश की पुष्टि नहीं हुई है।
3 अक्टूबर को भी नीलेश ओझा ने दावा किया था कि उन्हें पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की सेवा में बहाली से संबंधित गृह मंत्रालय को भेजी गई एक रिपोर्ट की जानकारी मिली है। उनके अनुसार, इस दस्तावेज से मामले में नए सवाल उठते हैं। उन्होंने बताया था कि संबंधित जानकारी सीबीआई को सौंपी गई है और जांच एजेंसी से आगे की कार्रवाई की मांग की गई है।
दिशा के परिवार ने मामले में कथित प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़ी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मौत किन परिस्थितियों में हुई थी।
सीबीआई की जांच में डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इलेक्ट्रॉनिक सामग्री में मौजूद तारीख, समय, रिकॉर्डिंग की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की पहचान जैसे पहलुओं की पुष्टि आवश्यक होगी। केवल पेन ड्राइव या वीडियो सौंपे जाने से उनमें मौजूद आरोप स्वतः प्रमाणित नहीं हो जाते।
फिलहाल सीबीआई की ओर से इन नए दावों पर किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की गई है। जांच एजेंसी का काम उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना है।
दिशा सालियान की मौत के छह साल बाद शुरू हुई नई जांच ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। परिवार द्वारा सौंपे गए डिजिटल साक्ष्यों और वकील के ताजा दावों के बाद अब सीबीआई की जांच पर नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नए साक्ष्यों से मामले में क्या तथ्य स्थापित होते हैं।
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