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करौंदे की चटपटी चटनी: Vitamin C से भरपूर दादी-नानी वाली रेसिपी

लाइफ स्टाइल:करौंदा, जिसे अंग्रेजी में क्रैनबेरी जैसा खट्टा फल माना जाता है, भारतीय घरों में लंबे समय से चटनी के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। खासकर उत्तर भारत और ग्रामीण इलाकों में करौंदे की चटपटी चटनी को दादी-नानी की रसोई का अहम हिस्सा माना जाता है। यह चटनी न सिर्फ स्वाद में खट्टी-मीठी और तीखी होती है, बल्कि इसमें विटामिन C की भरपूर मात्रा भी पाई जाती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है। बदलते समय में भले ही कई आधुनिक चटनियों ने जगह ले ली हो, लेकिन करौंदे की यह पारंपरिक चटनी आज भी अपने खास स्वाद और सेहत के कारण लोकप्रिय बनी हुई है।
इस चटनी को बनाने के लिए सबसे पहले ताजे करौंदों को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है। इसके बाद इन्हें हल्का उबालकर नरम किया जाता है ताकि उनका खट्टापन संतुलित हो सके। उबले हुए करौंदों को ठंडा करके मिक्सी में दरदरा पीस लिया जाता है। कुछ लोग इसे सिलबट्टे पर पीसना पसंद करते हैं, जिससे इसका देसी स्वाद और भी बढ़ जाता है। इसके बाद एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म किया जाता है, जिसमें राई, मेथी दाना और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है। यह तड़का चटनी को एक खास सुगंध और स्वाद देता है। तड़के के बाद इसमें पिसा हुआ करौंदा डाला जाता है और धीमी आंच पर पकाया जाता है। स्वाद के अनुसार इसमें नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा गुड़ या चीनी मिलाई जाती है, जिससे इसका खट्टा-तीखा स्वाद संतुलित हो जाता है। कुछ घरों में इसमें लहसुन और अदरक का पेस्ट भी डाला जाता है, जो इसके स्वाद को और गहरा बना देता है। लगभग 10 से 15 मिनट तक पकाने के बाद जब मिश्रण गाढ़ा हो जाता है, तो गैस बंद कर दी जाती है। यह चटनी पूरी तरह ठंडी होने के बाद कांच के जार में भरकर रखी जाती है और कई दिनों तक इस्तेमाल की जा सकती है। इसे पराठे, रोटी, दाल-चावल या समोसे के साथ परोसा जाता है। ग्रामीण इलाकों में इसे खास तौर पर सर्दियों में बनाया जाता है, क्योंकि उस समय करौंदे आसानी से उपलब्ध होते हैं और शरीर को गर्म रखने में भी मदद करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार करौंदा पाचन तंत्र के लिए लाभकारी होता है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि यह पारंपरिक चटनी सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।आज के समय में जब फास्ट फूड और रेडीमेड सॉस का चलन बढ़ रहा है, ऐसे में करौंदे की यह देसी चटनी फिर से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। यह रेसिपी न केवल पुरानी परंपराओं को जीवित रखती है, बल्कि घर के खाने को भी एक नया और प्राकृतिक स्वाद देती है।





