लाइफ स्टाइल

नीम की दातुन के फायदे ही नहीं नुकसान भी ऐसे करें इस्तेमाल

Ratna Netam
5 Oct 2026 7:32 PM IST
नीम की दातुन के फायदे ही नहीं नुकसान भी ऐसे करें इस्तेमाल
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लाइफ स्टाइल : भारत में नीम की दातुन से दांत साफ करने की परंपरा काफी पुरानी है। आज टूथब्रश और टूथपेस्ट लगभग हर घर में इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों से लेकर प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने वाले लोगों तक नीम की दातुन आज भी लोकप्रिय है। नीम में कई जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं और प्रयोगशाला अध्ययनों में इसके अर्क ने मुंह के कुछ बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि दिखाई है। हालांकि नीम की दातुन को दांतों की हर समस्या का इलाज मानना सही नहीं है।
नीम की दातुन से दांत साफ करने में मदद
दातुन का एक प्रमुख फायदा इसकी यांत्रिक सफाई है। जब दातुन के एक सिरे को चबाकर मुलायम रेशों में बदल दिया जाता है तो ये रेशे ब्रश की तरह दांतों की सतह पर जमा प्लाक और खाने के कुछ अवशेषों को हटाने में मदद करते हैं।नीम की दातुन और सामान्य टूथब्रश की तुलना करने वाले एक क्लिनिकल ट्रायल में दोनों तरीकों से मसूड़ों की स्थिति में सुधार देखा गया और नीम की दातुन प्लाक कम करने में प्रभावी पाई गई। हालांकि इस तरह के अध्ययनों की संख्या सीमित है, इसलिए उपलब्ध प्रमाणों को सावधानी से समझना चाहिए।
मुंह के बैक्टीरिया पर असर
नीम में निंबिडिन, अजाडिरैक्टिन और निंबिनिन जैसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। नीम के अर्क पर किए गए अध्ययनों में दांतों में कैविटी से जुड़े *Streptococcus mutans* जैसे बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीबैक्टीरियल गतिविधि देखी गई है। हालांकि लैब में नीम के अर्क पर मिले नतीजे सीधे यह साबित नहीं करते कि रोज दातुन करने से कैविटी निश्चित रूप से रुक जाएगी।
मसूड़ों की सफाई में हो सकती है मदद
सही तरीके से इस्तेमाल करने पर दातुन के मुलायम रेशे दांतों के साथ मसूड़ों के किनारों की सफाई में भी मदद कर सकते हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में नीम की दातुन को प्लाक और मसूड़ों की सूजन कम करने के मामले में टूथब्रश के तुलनीय पाया गया है। फिर भी इस विषय पर बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययनों की जरूरत बनी हुई है।
क्या नीम की दातुन कैविटी से बचाती है?
इस सवाल का सीधा जवाब देना मुश्किल है। दक्षिण भारत में 35 से 44 वर्ष के 400 लोगों पर हुए एक अध्ययन में नीम की दातुन इस्तेमाल करने वालों में कैविटी का अनुभव टूथब्रश इस्तेमाल करने वालों की तुलना में कम दर्ज किया गया था। लेकिन शोधकर्ताओं ने खुद स्पष्ट किया कि इस अध्ययन के आधार पर नीम की दातुन के कारण ही यह अंतर आया, ऐसा निर्णायक रूप से नहीं कहा जा सकता।इसलिए दातुन को फ्लोराइड टूथपेस्ट का प्रमाणित विकल्प मानना ठीक नहीं होगा। खासकर जिन लोगों को बार-बार कैविटी होती है, उन्हें अपने डेंटिस्ट की सलाह के अनुसार ओरल हाइजीन रूटीन अपनानी चाहिए।
गलत तरीके से दातुन करने के नुकसान
नीम की दातुन प्राकृतिक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे किसी भी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। बहुत कठोर या मोटी टहनी लेकर दांतों और मसूड़ों को जोर-जोर से रगड़ने से चोट लग सकती है। शोध में भी दातुन इस्तेमाल करने वालों को सही तकनीक सिखाने पर जोर दिया गया, ताकि मसूड़ों को नुकसान से बचाया जा सके।दातुन का सिरा बहुत कठोर होने पर मसूड़ों में दर्द या खून आने जैसी समस्या हो सकती है। गंदी, फफूंद लगी या लंबे समय से रखी दातुन इस्तेमाल करना भी उचित नहीं है। दातुन हमेशा साफ और ताजी होनी चाहिए।
नीम की दातुन करने का सही तरीका
इसके लिए साफ और ताजी, बहुत अधिक कठोर न होने वाली नीम की पतली टहनी चुनें। इसे पानी से अच्छी तरह साफ करें। एक सिरे को धीरे-धीरे चबाएं ताकि वह मुलायम होकर ब्रश जैसे रेशों में बदल जाए।अब इन रेशों से दांतों की बाहरी और अंदरूनी सतह को धीरे-धीरे साफ करें। ज्यादा दबाव न डालें। दांतों के पीछे और चबाने वाली सतह को भी साफ करें। इस्तेमाल के बाद मुंह को अच्छी तरह पानी से कुल्ला करें।दातुन साझा नहीं करनी चाहिए। अगर इस्तेमाल के दौरान मसूड़ों से लगातार खून आए, दर्द हो या मुंह में घाव बन जाए तो इसका उपयोग रोककर डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।
क्या टूथब्रश छोड़कर सिर्फ दातुन करनी चाहिए?
नीम की दातुन पारंपरिक ओरल हाइजीन का उपयोगी तरीका हो सकती है, लेकिन केवल इसके भरोसे आधुनिक डेंटल केयर को छोड़ना उचित नहीं है। नीम आधारित उत्पादों पर हुए अध्ययनों में अच्छे संकेत मिले हैं, लेकिन व्यवस्थित समीक्षा में उपलब्ध प्रमाणों की गुणवत्ता को सीमित बताया गया है और बेहतर शोध की जरूरत बताई गई है।दांत में लगातार दर्द, कैविटी, मसूड़ों से खून, सूजन, पस, बदबू या दांत हिलने जैसी समस्या हो तो दातुन से इलाज करने की कोशिश करने के बजाय डेंटिस्ट को दिखाना चाहिए।कुल मिलाकर, नीम की दातुन सही तरीके से की जाए तो दांतों से प्लाक और गंदगी हटाने तथा मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसके कुछ संभावित एंटीबैक्टीरियल फायदे भी वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आए हैं। लेकिन ज्यादा जोर से दातुन करना नुकसान पहुंचा सकता है और इसे दांतों की बीमारी के इलाज या नियमित डेंटल जांच के विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए।
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