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Lifestyle, लाइफस्टाइल: नाखून चबाना (Nail Biting) एक आम आदत है, जो अक्सर बचपन में शुरू होती है और कई बार यह आदत वयस्क होने के बाद भी बनी रहती है। आमतौर पर लोग इसे मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन लगातार नाखून चबाना आपके हाथों और नाखूनों की सुंदरता को प्रभावित कर सकता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून चबाने की आदत सिर्फ तटस्थ या मानसिक तनाव के कारण नहीं होती, बल्कि यह कई मानसिक और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकती है। जिन लोगों में यह आदत लगातार देखने को मिलती है, उनमें अक्सर निम्नलिखित कंडीशन देखी जाती हैं:
टॉरेट सिंड्रोम (Tourette Syndrome): इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में लोग अनियंत्रित मूवमेंट और आवाज़ें निकालते हैं। नाखून चबाना इसके लक्षणों में शामिल हो सकता है।
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD): इसमें बच्चों और वयस्कों में ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल होती है और नाखून चबाना जैसी आदतें दिखाई देती हैं।
अपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (ODD): यह व्यवहारिक डिसऑर्डर है, जिसमें लोग नियमों का पालन नहीं करते और नाखून चबाना जैसी आदतें दिखा सकते हैं।
सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर (Separation Anxiety Disorder): इस स्थिति में बच्चों को माता-पिता से दूर होने पर चिंता होती है, और तनाव कम करने के लिए नाखून चबाना जैसी आदतें विकसित हो सकती हैं।
नाखून चबाने की आदत सिर्फ हाथों की सुंदरता को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि इससे हैंड इंफेक्शन, दांतों की समस्या और पेट की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा, यह आदत सामाजिक रूप से शर्मिंदगी का कारण भी बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार नाखून चबाने वाले बच्चों और वयस्कों को उचित मेडिकल सलाह और थेरापी लेनी चाहिए। कई मामलों में दवाइयां और बिहेवियरल थेरेपी मददगार साबित होती हैं। इसके अलावा, पैदाइशी आदतें और तनावपूर्ण स्थितियों को समझकर सही मार्गदर्शन देना जरूरी है।
नाखून चबाने की आदत को रोकने के लिए नियमित मैनिक्योर, व्यस्तता में बदलाव, और तनाव कम करने की तकनीकें अपनाई जा सकती हैं। माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों में इस आदत के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
नाखून चबाना सिर्फ एक आम आदत नहीं, बल्कि कई मानसिक और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकता है। यह आदत न केवल हाथों और नाखूनों की सुंदरता को प्रभावित करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। बच्चों और वयस्कों में इस आदत को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ सलाह, थेरापी और सही देखभाल आवश्यक है।
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