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नवजात के लिए कितने घंटे सोना माना जाता है सामान्य? जानिए क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च
SHIDDHANT
2 March 2026 10:33 PM IST

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Delhi दिल्ली। जब घर में बच्चे का जन्म होता है, तो पूरे परिवार की दिनचर्या बदल जाती है। नवजात को लेकर कई तरह के सवाल माता-पिता के मन में छिपे होते हैं। इन तमाम सवालों में से एक सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि शिशु का कितनी देर तक सोना सामान्य माना जाता है। कई बार बच्चा दिन में ज्यादा सोता है और रात में बार-बार जागता रहता है। इससे माता-पिता घबरा जाते हैं और टेंशन लेने लगते हैं कि कहीं बच्चे की नींद में कोई समस्या तो नहीं।
लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों और नींद से जुड़ी वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि जीवन के शुरुआती महीनों में ऐसा होना पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया है। नवजात शिशु को दिन और रात का अंतर समझने में समय लगता है, इसलिए उसका सोने-जागने का पैटर्न बड़ों जैसा नहीं होता।
वैज्ञानिक शोध के अनुसार, जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों में शिशु औसतन 14 से 17 घंटे तक सो सकता है। कुछ बच्चे 18 घंटे तक भी सोते हैं, जबकि कुछ इससे थोड़ा कम सोते हैं। यह समय सामान्य माना जाता है। आमतौर पर वे दिन में लगभग 8 से 9 घंटे और रात में करीब 8 घंटे तक नींद लेते हैं, लेकिन यह नींद एक साथ नहीं होती। उनकी नींद छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी होती है। शुरुआत के दो महीनों में बच्चा 30 मिनट से लेकर 2 या 3 घंटे तक सोता है, फिर दूध के लिए जाग जाता है। इसका कारण यह है कि नवजात का पेट बहुत छोटा होता है और उसे हर दो से तीन घंटे में दूध की जरूरत पड़ती है। इसलिए उसकी नींद बार-बार टूटती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे तीन महीने की उम्र से पहले लगातार छह से आठ घंटे की नींद नहीं ले पाते। कुछ बच्चों में यह आदत चार से छह महीने के बीच विकसित होती है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसका शरीर धीरे-धीरे एक नियमित दिन-रात चक्र को पहचानने लगता है। रोशनी, आवाज और घर का माहौल भी इस प्रक्रिया में मदद करते हैं। दिन में हल्की रोशनी और सामान्य गतिविधियां, और रात में शांति और अंधेरा, बच्चे को यह समझने में मदद करते हैं कि कब सोना है और कब जागना है।
अब सवाल उठता है कि बच्चे इतने ज्यादा क्यों सोते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, नवजात का दिमाग और शरीर बेहद तेजी से विकसित हो रहा होता है। जन्म के बाद पहले साल में मस्तिष्क का विकास बहुत तेज गति से होता है। नींद के दौरान शरीर जरूरी हार्मोन बनाता है, जो कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करते हैं। इसी समय दिमाग नई जानकारियों को व्यवस्थित करता है। हालांकि माता-पिता को सतर्क भी रहना चाहिए। यदि बच्चा दूध पीने के लिए भी मुश्किल से जागता है, बहुत सुस्त दिखाई देता है, या अचानक पहले से ज्यादा सोने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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