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सेहत | आजकल स्मार्टफोन का इस्तेमाल हर किसी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, लेकिन यह अनिद्रा (insomnia) को बढ़ाने का एक बड़ा कारण भी बन सकता है। शोधों के अनुसार, स्मार्टफोन की नीली रोशनी सोने से पहले उपयोग करने से अनिद्रा का जोखिम 60% तक बढ़ सकता है।
नीली रोशनी का असर:
स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन नामक हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है, जो शरीर को नींद आने में मदद करता है। नीली रोशनी इसे कम करती है, जिससे सोने में समस्या होती है।
सोने से पहले स्मार्टफोन का उपयोग:
सोने से पहले अगर आप स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपकी नींद के चक्र को गड़बड़ कर सकता है। नींद का समय बढ़ने के बजाय, नीली रोशनी से सोने में ज्यादा समय लगता है, जिससे रात भर की नींद कम हो जाती है।
शोध का परिणाम:
एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग रात में स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं, उन्हें अनिद्रा के लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं। इसके अलावा, उनकी नींद की गुणवत्ता भी कम होती है, जिससे अगली सुबह थकान और सुस्ती महसूस होती है।
समाधान:
अगर आप सोने से पहले स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ सावधानियाँ बरतना जरूरी है। स्क्रीन ब्राइटनेस को कम करें, या फिर नीली रोशनी फिल्टर वाले मोड का उपयोग करें। बेहतर है कि सोने से कम से कम 30 मिनट पहले स्मार्टफोन और अन्य स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल ना करें।
इसलिए, स्मार्टफोन का उपयोग नींद की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है, और इससे अनिद्रा जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। बेहतर नींद के लिए डिजिटल डिवाइस का सीमित उपयोग महत्वपूर्ण है।





