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Health : अस्थमा के कारण सांस लेते समय खांसी-घरघराहट और सीने में जकड़न जैसी दिक्कत होने लगती है। श्वसन रोग विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है उन्हें निरंतर इसके जोखिम कारकों से बचाव करते रहने के लिए उपाय करते रहना चाहिए।
अस्थमा के लक्षण
सांस लेने में तकलीफ
बार-बार खांसी आना
छाती में जकड़न
सांस लेने के दौरान सीटी जैसी आवाज
जल्दी थकान महसूस होना
अगर इन लक्षणों की अनदेखी की जाए या सही इलाज न हो तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
योग न केवल फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, बल्कि श्वसन तंत्र की मजबूती, तनाव में कमी और प्रतिरक्षा तंत्र को भी मजबूत करता है। योग अस्थमा के लक्षणों को कम कर सकता है। नियमित सही तरीके से किए गए योगासनों से फेफड़ों की शक्ति बढ़ती है। योग श्वसन मार्गों की सफाई में मदद करता है। तनाव और चिंता कम करता है। योग से सांस लेने की तकनीक में सुधार होता है। इम्यूनिटी मजबूत होती है। आइए जानते हैं अस्थमा मरीजों के लिए प्रभावी योगासनों के बारे में।
सेतुबंधासन:
इस आसन के अभ्यास से सांस लेने की प्रक्रिया में सुधार होता है और फेफड़े खुलते हैं। अस्थमा से परेशान लोगों के लिए सेतुबंधासन का अभ्यास फायदेमंद होता है। सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को कंधे की चौड़ाई से अलग करते हुए घुटनों को मोड़ लें। अब हथेलियों को खोलते हुए हाथ जमीन में बिल्कुल सीधा सटा लें। सांस लेते हुए कमर के हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान कंधे और सिर को सपाट जमीन पर रखें। फिर सांस छोड़ते हुए पुरानी स्थिति में आ जाएं।
कपालभाति प्राणायाम:
प्राणायाम सांस की समस्याओं से राहत देने में मदद करता है और शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पद्मासन में बैठें और अपनी कमर सीधी रखें। गहरी सांस लेते हुए तेजी से पेट को अंदर करें और सांस को छोड़ें। लगातार दो से तीन मिनट तक इस आसन को दोहराएं।
भुजंगासन:
यह आसन श्वास लेने की क्षमता को बढ़ाता है और फेफड़ों को मजबूत बनाता है। साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हथेली को कंधे के नीचे रखें और सांस लेते हुए शरीर के आगे के भाग को ऊपर की ओर उठाएं। इस मुद्रा में 10-20 सेकेंड्स रहें, फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस अभ्यास को नियमित रूप से 10-15 बार किया जा सकता है।
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