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प्रकृति में खो जाने का नाम है ‘Forest Bathing’, जानें इसके फायदे

Dolly
18 Jun 2025 8:19 PM IST
प्रकृति में खो जाने का नाम है ‘Forest Bathing’, जानें इसके फायदे
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Lifestyle लाइफस्टाइल : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और थकान आम समस्याएं बन गई हैं। इनसे राहत पाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय आजमाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी प्रकृति की शरण में जाकर सुकून पाने की कोशिश की है?
'फॉरेस्ट बाथिंग' जो जापान से शुरू हुई एक प्राचीन प्रथा है, प्रकृति के बीच समय बिताकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक अनोखा तरीका है। आइए इस लेख में जानते हैं कि फॉरेस्ट बाथिंग क्या है और साथ ही इसके चार फायदे भी जानेंगे। फॉरेस्ट बाथिंग का मतलब जंगल में स्नान करना नहीं, बल्कि जंगल या हरे-भरे प्राकृतिक वातावरण में अपने सभी इंद्रियों के साथ समय बिताना है।
इसमें पेड़-पौधों को देखना, हवा की ताजगी को महसूस करना, पत्तियों की सरसराहट सुनना, और मिट्टी की खुशबू लेना शामिल है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें आप मोबाइल और अन्य ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहकर प्रकृति के साथ समय बिताते हैं। फॉरेस्ट बाथिंग तनाव वाले हार्मोन कोर्टिसोल के लेवल को कम करती है। जंगल की शांति और हरियाली दिमाग को शांत करती है, जिससे चिंता और अवसाद के लक्षणों में राहत मिलती है।
पेड़-पौधे फाइटोन्साइड्स नामक रसायन छोड़ते हैं, जो हवा में फैलकर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। फॉरेस्ट बाथिंग के दौरान इन रसायनों को सांस के जरिए ग्रहण करने से शरीर में नेचुरल किलर सेल्स बढ़ते हैं, जो गंभीर बीमारियों और वायरल इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। प्रकृति में समय बिताने से दिमाग तरोताजा होता है, जिससे एकाग्रता और रचनात्मकता बढ़ती है।
फॉरेस्ट बाथिंग डिजिटल स्क्रीन के कारण होने वाली मानसिक थकान को कम करती है। इससे आपका फोकस बढ़ता है और प्रोडक्टिवीटी अच्छी होती है। फॉरेस्ट बाथिंग के लिए किसी खास प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है। नजदीकी पार्क, जंगल, या हरे-भरे क्षेत्र में जाएं। फोन को साइलेंट करें, संभव हो तो फोन घर पर ही छोड़कर जाएं और धीरे-धीरे टहलें। गहरी सांस लें, प्रकृति को महसूस करें, और बिना जल्दबाजी के समय बिताएं।
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